Bilaspur news-" हाथी दल का आतंक" रोज शाम 4:00 बजे धावा"48 जंगली हाथियों का आतंक, गांव के 10 घर उजड़े"पेड़ों के नीचे रहने को मजबूर"ग्रामीण,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
कटघोरा वनमंडल में 48 जंगली हाथियों का आतंक, धोबीबारी गांव के 10 घर उजड़े – ग्रामीण पेड़ों के नीचे रहने को मजबूर
बिलासपुर /कटघोरा (कोरबा) – कटघोरा वनमंडल के जटगा रेंज अंतर्गत ग्राम कटोरी नगोई के आश्रित ग्राम धोबीबारी में जंगली हाथियों के बड़े दल ने भारी तबाही मचा दी है। लगभग 48 हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से क्षेत्र में सक्रिय है, जिससे पूरा गांव दहशत में है।
10 कच्चे मकान तोड़े, परिवार बेघर
हाथियों के झुंड ने धोबीबारी में घुसकर करीब 10 परिवारों के कच्चे मकानों को तहस-नहस कर दिया। घरों की दीवारें और छप्पर तोड़ दिए गए, घरेलू सामान बर्बाद हो गया। अचानक हुए हमले के कारण ग्रामीण जान बचाकर भागे।
प्रभावित परिवारों में पंडों, रजवार, गोंड और धोबी समुदाय के लोग शामिल हैं। कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे या पेड़ों के नीचे शरण लेने को मजबूर हैं। महिलाओं और बच्चों की स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय बताई जा रही है।
मवेशियों की मौत, आर्थिक नुकसान
हाथियों के हमले में तीन बकरियों और एक दूध देने वाले पशु की मौत हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यही उनकी आजीविका का मुख्य साधन था। मवेशियों के नुकसान से परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है।
रोज शाम 4 बजे गांव में धावा
ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों का दल रोज शाम करीब 4 बजे गांव की ओर बढ़ता है। जैसे ही अंधेरा होता है, हाथी खेतों और घरों की ओर रुख कर देते हैं। लगातार हमलों से लोगों में भय का माहौल है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और किसान खेतों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
वन विभाग पर लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सूचना देने के बावजूद हाथियों को प्रभावी तरीके से भगाने में विभाग नाकाम रहा है। मौके पर टीम पहुंचती है, लेकिन हाथियों को स्थायी रूप से खदेड़ने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही।
मुआवजा और सुरक्षा की मांग
पीड़ित परिवारों ने शासन-प्रशासन से तत्काल मुआवजा, अस्थायी आवास की व्यवस्था और हाथियों से सुरक्षा के लिए स्थायी उपाय करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक हाथियों का झुंड क्षेत्र से पूरी तरह नहीं हटता, तब तक उनकी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीण रातें जागकर बिताने को मजबूर हैं। वन विभाग की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।
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