Bilaspur news-"नाबालिगों का बाल विवाह पर टीम का एक्शन,,,,,,गाँव मे रची जा रही कुप्रथा के खिलाफ विभाग की कार्रवाई,,,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,
महिला बाल विकास विभाग की दबिश, दो नाबालिगों का बाल विवाह रुकवाया,,,,
बिलासपुर /पेंड्रा- जिले में बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मरवाही थाना क्षेत्र के चर्चेडी गांव में होने जा रहे एक बाल विवाह को समय रहते रुकवा दिया। टीम की तत्परता से दो नाबालिग—एक बालिका और एक बालक—का विवाह संपन्न होने से पहले ही रोक दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग को सूचना मिली थी कि चर्चेडी गांव में एक नाबालिग बालिका का विवाह तय किया गया है। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम मौके पर पहुंची और दस्तावेजों का सत्यापन किया। जांच में बालिका की उम्र 17 वर्ष 1 माह 30 दिन तथा बालक की उम्र 19 वर्ष 9 माह 12 दिन पाई गई, जो कि निर्धारित वैधानिक आयु से कम है।
गौरतलब है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बालिका के विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा बालक की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। सत्यापन के बाद टीम ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित विवाह कानूनन अवैध है।
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने दोनों पक्षों—बालक एवं बालिका के माता-पिता और रिश्तेदारों—को समझाइश दी और बाल विवाह से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। टीम ने उन्हें कानून के प्रावधानों और संभावित दंडात्मक कार्रवाई के बारे में भी अवगत कराया। समझाइश के बाद परिजनों ने विवाह स्थगित करने पर सहमति जताई।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जिले में बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है और आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि ऐसी किसी भी घटना की जानकारी संबंधित विभाग या पुलिस को तुरंत दें, ताकि समय रहते रोकथाम की जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा है, जिसे जड़ से खत्म करने के लिए सतत जागरूकता और कड़ी निगरानी आवश्यक है।
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