Bilaspur news-"""न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास""अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महाआंदोलन में बैठी महिलाओं ने कहा व्यर्थ नहीं जाएगा त्याग और बलिदान"लिंगियाडीह 108वां दिन महाआंदोलन का,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
""न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास""अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महाआंदोलन में बैठी महिलाओं ने कहा व्यर्थ नहीं जाएगा त्याग और बलिदान"लिंगियाडीह 108वां दिन महाआंदोलन का,,,
बिलासपुर- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन में बैठी महिलाओं ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया। महिलाओं ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि न्यायालय से उन्हें न्याय मिलेगा और उनके पक्ष में फैसला आएगा। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि उनका त्याग और संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा, क्योंकि यह लड़ाई उनके आशियाने और उनके बच्चों के भविष्य की है।
दरअसल, लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन को आज 108 दिन पूरे हो गए हैं। पिछले कई महीनों से बड़ी संख्या में महिलाएं लगातार धरने पर बैठकर अपने अधिकारों और घरों को बचाने की मांग कर रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन भी महिलाओं ने आंदोलन स्थल पर एकजुट होकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और कहा कि यही उनके लिए महिला दिवस का सम्मान है कि वे अपने हक और अपने परिवार के आशियाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपने घरों और बस्ती को बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि वे न्यायपालिका का सम्मान करती हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि अदालत उनके पक्ष में न्याय करेगी। महिलाओं का कहना था कि उनका संघर्ष सिर्फ उनके घरों के लिए नहीं बल्कि उनके बच्चों के भविष्य के लिए भी है, इसलिए वे पीछे हटने वाली नहीं हैं।
इस आंदोलन में कई सामाजिक और जनप्रतिनिधि भी समर्थन देने पहुंचे। आंदोलन में प्रमुख रूप से श्रीमती यशोदा पाटिल, कुंती तिवारी, डॉ. रघु साहू, साखन दरवे, भोला राम साहू, प्रशांत मिश्रा, श्रवण दास मानिकपुरी, चतुर सिंह यादव, सिद्धार्थ भारती, आदर्श सिद्धार्थ, दिनेश घोरे, डॉ. अशोक शर्मा, रूपेश साहू, ओंकार साहू, गोपी देवांगन, गोलू देवांगन, अग्नू साहू और सलीम मेमन सहित कई नागरिक उपस्थित रहे।
वहीं आंदोलन में मातृशक्ति की भी भारी भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं धरना स्थल पर मौजूद रहीं और आंदोलन को मजबूती देती रहीं। इनमें रामबाई, राधा साहू, रामौतिन, सूरजबाई, कुमारी निषाद, संतोषी यादव, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, फुल बाई साहू, पिंकी देवांगन, अनिता पाटील, उर्मिला पाटिल, लीला पाटिल, रूपा सरकार, सरस्वती देवांगन, पुष्पा देवांगन, लता देवांगन, राजकुमारी देवांगन, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, सनी अहिरवार, चंद्रमा अहिरवार, जयकुमार अहिरवार, पीहरिया केवट, सोन बाई, कुंडिया केवट, सोनिया केवट, नंदनी ध्रुव, पिंकी बाई चौहान, प्रमिला ध्रुव, रानी देवांगन, साधना यादव, चंद्रकली निषाद, सीता साहू, सुशीला साहू, सुवासिन साहू, कुमारी यादव, अमेरिका श्रीवास, नंद कुमारी देवांगन, अनीता ध्रुव, रूपा देवी, गायत्री देवांगन, सहोदर गोड, सीता केवट, जानकी देवांगन, सोनिया मानिकपुरी, कौशल्या मानिकपुरी, मालती मानिकपुरी, मरजीना बेगम, सरस्वती यादव, वंदना डे, खोलबहरीन यादव, अनूपा श्रीवास, सुशीला श्रीवास, रामबाई मानिकपुरी, दुर्गा श्रीवास, सावित्री यादव, सुखमति मानिकपुरी, मीरा, शिवकुमारी देवांगन, अर्पणा पटेल, हेमलता देवांगन, सरिता राजपूत, मालती यादव और संतोष सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक यह सर्वदलीय महा-धरना आंदोलन जारी रहेगा। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि वे अपने घर और अपने अधिकारों के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने को तैयार हैं।
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