Bilaspur news-"एक बार फिर विवादों और जांच के घेरे में बिलासपुर शिक्षा विभाग के निलंबित सहायक ग्रेड-2 विकास तिवारी""?"आय से अधिक संपत्ति मामले में कलेक्टर से शिकायत"DEO ने बनाई""3 सदस्यीय जांच टीम,,,,,?

शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
एक बार फिर विवादों और जांच के घेरे में बिलासपुर शिक्षा विभाग के निलंबित सहायक ग्रेड-2 विकास तिवारी""?

"आय से अधिक संपत्ति मामले में कलेक्टर से शिकायत"DEO ने बनाई""3 सदस्यीय जांच टीम,,,,,?

बिलासपुर- जिला शिक्षा विभाग में पदस्थ निलंबित सहायक ग्रेड-2 विकास तिवारी एक बार फिर विवादों और जांच के घेरे में आ गए हैं। भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति ने कलेक्टर बिलासपुर को शिकायत भेजकर तिवारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने की मांग की है। 
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए,,जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बिलासपुर ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है, जो तिवारी की संपत्तियों और आरोपों की विस्तृत पड़ताल करेगी।
करोड़ों की संपत्ति का आरोप
शिकायत पत्र में समिति ने दावा किया है कि विकास तिवारी के पास उनकी वैध आय से कहीं अधिक अचल संपत्ति है। आरोपों के अनुसार शहर और आसपास के इलाकों में उनकी कई संपत्तियां बताई जा रही हैं, जिनमें—
नेहरू नगर रहसी क्षेत्र में दो मंजिला मकान
उसी मकान से लगी छह दुकानें
नेहरू नगर क्षेत्र में ही दो अन्य मकान
मुंगेली नाका के पास एक दुकान
सरगांव क्षेत्र में लगभग सात एकड़ कृषि भूमि
सकरी और चौबे कॉलोनी में प्लॉट
मोपका चौक के पहले एक और प्लॉट
समिति का आरोप है कि इन सभी संपत्तियों का बाजार मूल्य करोड़ों रुपये में है, जो एक सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी की आय से मेल नहीं खाता।
कोविड काल की नियुक्तियों पर भी सवाल
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। समिति के मुताबिक कोविड-19 महामारी के दौरान 62 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। बाद में जांच में 11 नियुक्तियां फर्जी पाई गईं और संबंधित कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त भी कर दिया गया।
समिति का कहना है कि उस समय कार्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने के बावजूद विकास तिवारी पर अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं हुई, जबकि पूरे मामले में उनकी भूमिका की जांच होना जरूरी है।
पहले से निलंबित हैं तिवारी
विकास तिवारी फिलहाल शिक्षकों के पदोन्नति प्रकरण में अनियमितता और शासन के आदेशों की अवहेलना के आरोप में पहले से ही निलंबित चल रहे हैं। ऐसे में आय से अधिक संपत्ति और पुरानी नियुक्तियों से जुड़े आरोप सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है।
तीन सदस्यीय टीम करेगी जांच
डीईओ कार्यालय द्वारा गठित टीम को तिवारी की संपत्तियों, आय के स्रोत और नियुक्तियों से जुड़े आरोपों की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
दोष सिद्ध होने पर बर्खास्तगी की मांग
भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति ने मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो विकास तिवारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप साबित होते हैं तो शिक्षा विभाग में यह मामला बड़ा भ्रष्टाचार प्रकरण बन सकता है। वहीं दूसरी ओर, जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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