Bilaspur news-""" बिलासपुर की सरज़मी से""Ayatollah Ali Khamenei" की शहादत पर ईरानी समाज का भावुक ""कैंडल मार्च"""""खामनेई केवल एक राज़नीतिक नेता हि नही बल्कि एक धार्मिक मार्गदर्शक और अध्यातिमक प्रतीक भी,,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
" बिलासपुर की सरज़मी से""Ayatollah Ali Khamenei" की शहादत पर ईरानी समाज का भावुक कैंडल मार्च""
"""खामनेई केवल एक राज़नीतिक नेता हि नही बल्कि एक धार्मिक मार्गदर्शक और अध्यातिमक प्रतीक भी,,,,,
बिलासपुर -छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर के चाँटीडीह क्षेत्र में रविवार शाम उस वक्त गमगीन माहौल देखने को मिला, जब ईरानी समाज एवं शिया समुदाय के लोगों ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की शहादत की खबर पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कैंडल मार्च निकाला। ईरानी मोहल्ले से प्रारंभ हुआ यह जुलूस क्षेत्र की प्रमुख सड़कों से होता हुआ पुनः निर्धारित स्थल पर समाप्त हुआ।
मोमबत्तियों की रोशनी में श्रद्धांजलि
हाथों में जलती मोमबत्तियां और खामनेई की तस्वीरें लिए बड़ी संख्या में लोग इस मार्च में शामिल हुए। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सहभागिता ने आयोजन को सामुदायिक एकता का स्वरूप दे दिया। कई लोग काले वस्त्रों में नजर आए, जो शोक और सम्मान का प्रतीक था। पूरे मार्ग में अनुशासन और शांति बनाए रखी गई।
मार्च के दौरान उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। वातावरण में गंभीरता और भावुकता साफ झलक रही थी। कई लोगों की आंखें नम थीं, जो इस घटना से उनकी भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती थीं।
“केवल राजनीतिक नेता नहीं, आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी थे”
कार्यक्रम में समुदाय के वरिष्ठ सदस्यों ने संबोधित करते हुए कहा कि Ayatollah Ali Khamenei केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि वे विश्वभर के शिया मुसलमानों के लिए एक धार्मिक मार्गदर्शक और आध्यात्मिक प्रतीक भी थे। वक्ताओं ने उनके नेतृत्व, विचारधारा और वैश्विक स्तर पर शिया समुदाय पर पड़े प्रभाव को याद किया।
उन्होंने कहा कि उनके बताए सिद्धांतों—एकता, धैर्य और धार्मिक मूल्यों—पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
शांति और भाईचारे का संदेश
कैंडल मार्च के दौरान किसी प्रकार की नारेबाजी या उत्तेजक गतिविधि नहीं की गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि और सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। अंत में सामूहिक दुआ की गई और शहर में आपसी भाईचारे, सौहार्द एवं शांति बनाए रखने की अपील की गई।
इस अवसर पर शेख अब्दुल मन्नान भाई, अहमद भाई, समीर भाई एवं शेख सरफराज अहमद विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रशासन की निगरानी में शांतिपूर्ण आयोजन
स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में कैंडल मार्च शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। सुरक्षा के मद्देनज़र आवश्यक इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरे कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई।
चाँटीडीह के ईरानी मोहल्ले में निकला,यह जुलूस शहर में सामाजिक एकजुटता, अनुशासन और शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति का उदाहरण बनकर सामने आया। समुदाय के लोगों ने कहा कि वे इस दुख की घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़े हैं और शांति व सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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