Bilaspur news-"जानिये करगीखुर्द हत्याकांड की असली सच्चाई : एक थप्पड़ से शुरू हुई कहानी, जो मौत पर खत्म हुई…

शेख असलम की रिपोर्ट,,,,,
जानिये खुर्द हत्याकांड की असली सच्चाई : एक थप्पड़ से शुरू हुई कहानी, जो मौत पर खत्म हुई…

बिलासपुर -जिले के कोटा थाना क्षेत्र का छोटा सा गांव करगी खुर्द… रविवार की सुबह यहां सब कुछ सामान्य था। खेतों की ओर जाते लोग, गांव की रोज़मर्रा की हलचल… लेकिन कुछ ही देर में यह सन्नाटा चीखों में बदल गया।
                     घायल -शरद कौशिक 
यह कहानी है एक ऐसे विवाद की, जो शुरू तो बहुत मामूली हुआ था—लेकिन अंजाम इतना खौफनाक हुआ कि पूरे गांव की रूह कांप उठी। होलिका दहन से शुरू हुई चिंगारी,,,,
कुछ दिन पहले, होलिका दहन के समय एक छोटी-सी बात पर विवाद हुआ। आरोप था कि मोहन पांडे (52) के घर से लकड़ी चोरी हुई है। इसी बात को लेकर उनका सामना राजाराम साहू से हुआ।
बात इतनी बढ़ी कि गुस्से में मोहन पांडे ने राजाराम को एक थप्पड़ मार दिया।मामला थाने तक पहुंचा, एफआईआर भी दर्ज हुई…
लेकिन कागजों में शांत हुआ विवाद, राजाराम के मन में सुलगता रहा।
वह मकान जहाँ मृतक के ऊपर हमला हुआ,,

 बदले की आग में रची गई साजिश,,
रविवार की सुबह, करीब 8 से 9 बजे के बीच, मोहन पांडे अपने खेत देखने करगी खुर्द पहुंचे।
उन्हें क्या पता था कि कोई पहले से उनकी राह देख रहा है…
घात लगाए बैठे राजाराम साहू अपने परिवार के साथ वहां पहुंचा—बड़ा भाई, भतीजा, मां और बहन…
और फिर शुरू हुआ वह हमला, जिसे गांव वाले आज भी याद कर सिहर उठते हैं। बेरहमी की हद पार,,,लाठी, डंडे, ईंट और फरसे से मोहन पांडे पर ताबड़तोड़ वार किए गए।
वह जमीन पर गिर पड़े… लेकिन हमलावरों का गुस्सा थमा नहीं।
बताया जाता है कि घायल हालत में ही उन्हें घसीटा गया।
इस बीच, जब शरद कौशिक बीच-बचाव करने लगा , तो उन पर भी जानलेवा हमला किया गया।
वह गंभीर रूप से घायल हो गए।एक परिवार उजड़ गया,,,,
कुछ ही पलों में सब खत्म हो चुका था।मोहन पांडे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।वह गनियारी गांव के रहने वाले थे—पीछे पत्नी (जो एक शिक्षिका हैं) और दो बच्चों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए।रविवार को वह सिर्फ अपने खेत की देखरेख के लिए आए थे… लेकिन लौटकर कभी घर नहीं जा सके। पुलिस की त्वरित कार्रवाई,,,,घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तेजी दिखाते हुए,,,
 मुख्य आरोपी राजाराम साहू समेत कुल पांच लोगों को हिरासत में ले लिया।शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मामले की गहन जांच जारी है। 

एक सवाल जो रह गया…क्या एक थप्पड़ की कीमत किसी की जान हो सकती है?करगी खुर्द की यह घटना एक कड़वी सच्चाई सामने लाती है—छोटी-सी रंजिश, जब अहंकार और बदले की आग में बदल जाती है, तो उसका अंत सिर्फ तबाही होता है।गांव आज भी सहमा हुआ है…और एक परिवार, हमेशा के लिए टूट चुका है। अगर मृतक मोहन पांडे अपने परिवार के साथ खेत देखने के लिए घर पहुंचा होता तो आज जो दृश्य है वह और भी भयावह हो सकती थी?

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