Bilaspur news-"पंचायत में महाघोटाले का आरोप, नाले पर कब्जा और मनरेगा फंड पर सवाल,,, सरपंच पर लगे गंभीर आरोप"जाँच मे और भी घोटालो का हो सकता है खुलासा?

बिलासपुर ब्रेकिंग,,,,
 महमंद पंचायत में महाघोटाले का आरोप, नाले पर कब्जा और मनरेगा फंड पर सवाल,,, सरपंच पर लगे गंभीर आरोप"जाँच मे और भी घोटालो का हो सकता है खुलासा?

बिलासपुर-जिले के लालखदान क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत महमंद इन दिनों गंभीर विवादों के केंद्र में है। यहां की वर्तमान सरपंच श्रीमती पूजा विक्की निर्मलकर पर शासकीय संपत्ति पर कब्जा, पद के दुरुपयोग और मनरेगा योजना में लाखों रुपए की गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और ग्रामीण खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
 क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों के अनुसार, खसरा नंबर 62 में लगभग 15 वर्ष पहले मनरेगा योजना के तहत 20 फीट चौड़े शासकीय नाले का निर्माण कराया गया था। यह नाला गांव के किसानों के लिए सिंचाई और बारिश के पानी की निकासी का प्रमुख साधन था।

आरोप है कि:
सरपंच द्वारा इस नाले को पूरी तरह पाट दिया गया
नाले की जमीन पर अवैध रूप से पक्का मकान निर्माण किया जा रहा है
सार्वजनिक उपयोग की जमीन को निजी संपत्ति में बदला जा रहा है
 मनरेगा में 4 लाख की गड़बड़ी?
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस स्थान पर पहले से बना नाला पाट दिया गया, उसी जगह दोबारा नाला निर्माण के नाम पर लगभग 4 लाख रुपये की स्वीकृति ली गई है।

 ग्रामीणों का ये आरोप:है 
फर्जी कार्य दिखाकर राशि आहरण की तैयारी
सरकारी धन का दुरुपयोग और घोटाला
कार्यस्थल पर वास्तविक निर्माण का अभाव


नाले की चौड़ाई: 20 फीट (सरकारी रिकॉर्ड अनुसार)

 निर्माण अवधि: करीब 15 वर्ष पूर्व

 योजना: मनरेगा (ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना)

 विवादित राशि: ₹4 लाख

उपयोग: सिंचाई + जल निकासी (डुअल रोल)

 विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी शासकीय नाले को पाटना जल निकासी प्रणाली को बाधित करता है, जिससे बारिश में जलभराव और फसल नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।
 ग्रामीणों में आक्रोश
गांव के लोगों का कहना है कि:
“यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि गांव की जरूरतों के साथ खिलवाड़ है।”
ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन से मांग की है कि:
मौके पर एसडीएम या तहसीलदार स्तर की जांच टीम भेजी जाए
अवैध कब्जा तुरंत हटाया जाए
मनरेगा फंड पर तुरंत रोक लगाई जाए

 कानूनी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो:
छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत सरपंच को पद से बर्खास्त किया जाए
शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और गबन के मामले में एफआईआर दर्ज की जाए

 अब क्या?
यह मामला अब सिर्फ पंचायत स्तर का नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासन की साख से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
👉 पूरे जिले की नजर अब इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और कार्रवाई कितनी सख्त।:
महमंद पंचायत का यह विवाद ग्रामीण प्रशासन, पारदर्शिता और विकास योजनाओं की वास्तविकता पर बड़े सवाल खड़े करता है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला जिले में मनरेगा घोटालों का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

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