Bilaspur news-"छत्तीसगढ़ में पशु आश्रय स्थलों की बदहाल हालत पर उठे सवाल""एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष नीलेश बिस्वास ने की निष्पक्ष जांच की मांग,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,
छत्तीसगढ़ में पशु आश्रय स्थलों की बदहाल हालत पर उठे सवाल""एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष नीलेश बिस्वास ने की निष्पक्ष जांच की मांग,,,
बिलासपुर -छत्तीसगढ़ में संचालित कई पशु आश्रय स्थलों (गौशालाओं) की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां इन आश्रय स्थलों का उद्देश्य बेसहारा और घायल पशुओं को सुरक्षा, चारा, पानी और उपचार उपलब्ध कराना है, वहीं कई स्थानों पर इन व्यवस्थाओं का अभाव देखने को मिल रहा है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नीलेश बिस्वास ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राज्य के कई पशु आश्रय स्थलों की हालत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और पानी तक उपलब्ध नहीं है, जबकि कागज़ों में इन आश्रय स्थलों के संचालन और देखभाल के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए जा रहे हैं।
जमीन पर बदहाल व्यवस्था
सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक कई पशु आश्रय स्थलों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था नहीं है,स्वच्छ पानी की कमी बनी रहती है,बीमार पशुओं के इलाज की सुविधा नहीं है,कई जगहों पर छाया और सुरक्षित शेड भी पर्याप्त नहीं हैं,इसके कारण कई पशु कुपोषण और बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कुछ स्थानों पर पशुओं की मौत के मामले भी सामने आने की बात कही जा रही है।
कागजों में लाखों का खर्च,बताया जा रहा है कि शासन और स्थानीय निकायों द्वारा पशु आश्रय स्थलों के संचालन के लिए हर साल लाखों रुपये का बजट जारी किया जाता है। इसमें चारा, दवाई, कर्मचारियों की व्यवस्था और रखरखाव के लिए राशि निर्धारित होती है।लेकिन कई मामलों में यह आरोप सामने आ रहा है कि वास्तविक खर्च और कागजी खर्च में बड़ा अंतर है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
प्रदेश में पहले भी कई सामाजिक संगठनों और पशु प्रेमियों ने गौशालाओं की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। कई जगह निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि पशुओं की संख्या और उनके लिए उपलब्ध संसाधनों के बीच बड़ा अंतर है।
निष्पक्ष जांच की मांग
एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष नीलेश बिस्वास ने कहा कि बेजुबान पशुओं के नाम पर किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि:
सभी पशु आश्रय स्थलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए
खर्च किए गए बजट का ऑडिट कराया जाए
लापरवाही या गड़बड़ी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए
उन्होंने यह भी कहा कि पशु आश्रय स्थल केवल कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि वहां वास्तव में पशुओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिलना चाहिए।
पशु संरक्षण की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि पशु आश्रय स्थलों का सही संचालन न केवल पशु संरक्षण के लिए जरूरी है बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि इन संस्थानों में पारदर्शिता और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तो बेसहारा पशुओं को बेहतर जीवन मिल सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि पशु आश्रय स्थलों की स्थिति को लेकर उठे इन सवालों पर सरकार और प्रशासन किस तरह की कार्रवाई करता है।
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