Bilaspur news-"2 नाबालिगो के परिवारों ने SSP से की सतीश मिश्रा के खिलाफ शिकायत?""नाबालिगों को धमकाकर लाखों की वसूली का आरोप" निष्पक्ष जांच की मांग,,,,

शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
2 नाबालिग़ के परिवारों ने SSP से की सतीश मिश्रा के खिलाफ शिकायत""नाबालिगों को धमकाकर लाखों की वसूली का आरोप" निष्पक्ष जांच की मांग,,,,

बिलासपुर - जैसा कि हमने पहले ही समाचार प्रकाशित कर बताया था और प्रार्थी सतीश मिश्रा पुलिस अधिकारी का पक्ष सामने लाया था अब इसके बाद इस नाबालिक चोरी मामले में एक बड़ा ट्वीट सामने आया है,,,
दो नाबालिगो के परिवार वालो ने प्रार्थी सतीश मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए,, आईए जानते हैं एक नजर में यह सारा मामला क्या है,,, अब सभी की निगाहें जांच पर टिकी हुई?

“घर का चोर या हालात का शिकार?”
नाबालिग के कदमों ने खड़ी की पहेली, पिता और पुलिस आमने-सामने
बिलासपुर में नाबालिगों से अवैध वसूली का सनसनीखेज आरोप, दो परिवारों ने खोला मोर्चा
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) | विशेष संवाददाता
बिलासपुर के सकरी थाना क्षेत्र स्थित आसमा सिटी की एक सामान्य दिखने वाली कॉलोनी इन दिनों एक ऐसी उलझी हुई कहानी का केंद्र बन गई है, जिसने न सिर्फ एक परिवार बल्कि पूरे शहर को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह मामला अब महज चोरी तक सीमित नहीं रहा—बल्कि इसमें नाबालिगों पर मानसिक दबाव, अवैध वसूली, धमकी और पुलिस जांच पर सवाल जैसे गंभीर पहलू जुड़ गए हैं।
 शुरुआत: अलमारी से गायब जेवर, घर में ही मिला सुराग
25 फरवरी 2026 को सतीश मिश्रा नामक व्यक्ति ने सकरी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनके घर की अलमारी से सोने के जेवर गायब हैं और उनकी जगह नकली गहने रख दिए गए हैं।
पहली नजर में यह एक सामान्य चोरी का मामला लगा, लेकिन पुलिस जांच में जो सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया। चोरी किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि घर के ही नाबालिग बेटे ने की थी। नाबालिग का खुलासा: कर्ज, दबाव और शौक की कहानी,जांच में सामने आया कि नाबालिग ने—घर से जेवर चुपचाप निकाले,उन्हें अलग-अलग जगह गिरवी रखा,,मिले पैसों से दोस्तों की उधारी चुकाई
और बाकी रकम अपने शौक पूरे करने में खर्च कर दी
यहां तक मामला एक पारिवारिक चूक जैसा लगा… लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी।
 पिता का दावा: “मेरा बेटा मजबूर था”
सतीश मिश्रा ने पुलिस की कहानी से अलग दावा किया। उनका कहना है—
“मेरा बेटा अकेला दोषी नहीं है, उसे उसके दोस्तों ने धमकाकर और दबाव बनाकर ऐसा करने पर मजबूर किया।”
यहीं से मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया— क्या यह अपराध था या दबाव में उठाया गया कदम?

 पुलिस का पक्ष: “प्रार्थी बदल रहा बयान”
सकरी थाना प्रभारी विजय चौधरी ने स्पष्ट किया—
जांच पूरी पारदर्शिता से की गई,प्रार्थी पहले ही लिखित में कार्रवाई न चाहने की बात दे चुका है,बार-बार बुलाने के बावजूद बयान देने नहीं आ रहा,,अब मीडिया के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है,,,,,
 पुलिस का साफ आरोप—
“प्रार्थी अपने बयान बदलकर जांच को गुमराह कर रहा है।” दूसरा बड़ा खुलासा: ATM से निकाले ₹1.85 लाख
घटना के 10–15 दिन बाद नाबालिग ने एक और चौंकाने वाला कदम उठाया—
अपनी मां के ATM से ₹1,85,000 निकाले
यह रकम भी दोस्तों की उधारी और निजी खर्च में खर्च कर दी,,,इससे साफ हुआ कि मामला एक बार की गलती नहीं, बल्कि गहराता पैटर्न है। समझौते की परत: घर में सुलझा मामला,,गिरवी रखे गए जेवर वापस लिए गए,व्यापारियों से समझौता हुआ,परिवार ने कानूनी कार्रवाई से दूरी बना ली, यानी मामला कानूनी लड़ाई तक पहुंचने से पहले ही “घर के भीतर” सुलझा लिया गया। फिर क्यों उठा विवाद?सबसे बड़ा सवाल यहीं खड़ा होता है—जब प्रार्थी खुद कार्रवाई नहीं चाहता, तो फिर मीडिया में आरोप क्यों?जब समझौता हो चुका, तो नया विवाद क्यों?क्या नाबालिग वाकई दबाव में था या यह गलत संगति का नतीजा है? नया मोड़: नाबालिगों से अवैध वसूली का बड़ा आरोप,,,इसी बीच, बिलासपुर से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।
दो परिवारों ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत
आरोप है कि—एक नाबालिग और उसके पिता ने मिलकर
अन्य नाबालिग बच्चों को निशाना बनाया,दोस्ती और सहानुभूति के जरिए जाल बिछाया,,और फिर धमकी देकर लाखों रुपये की वसूली कैसे फंसाए गए बच्चे?
पीड़ित परिवारों के अनुसार—पहले बच्चों से दोस्ती की गई
फिर बीमारी और संकट की झूठी कहानियां सुनाईं
धीरे-धीरे पैसों की मांग शुरू की गई,,मना करने पर जान से मारने और फंसाने की धमकी दी गई,बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए भी बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई,,,महिला से अभद्रता और मारपीट का आरोप,,एक पीड़ित महिला का आरोप—
बेटे को बचाने आरोपी के घर पहुंची,,,,,
वहां गाली-गलौच, धक्का-मुक्की और जान से मारने की धमकी दी गई,“पंडित” बनकर डराने का आरोप
दूसरे परिवार का दावा—आरोपी खुद को “पंडित” बताता था
जादू-टोना कर परिवार खत्म करने की धमकी देता था
जिससे बच्चे गंभीर मानसिक तनाव में आ गये है,,, पुलिस व प्रशासन से दोनों परिवारों ने मांग की है—FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई,,,बैंक, कॉल रिकॉर्ड और चैट की जांच
पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच,,,पीड़ित परिवारों को सुरक्षा
 समाज के लिए बड़ा सवाल,यह मामला सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं— यह एक आईना है समाज के सामने:
क्या बच्चे गलत संगति में फंस रहे हैं?क्या आर्थिक दबाव और दिखावे की चाह उन्हें अपराध की ओर धकेल रही है?
क्या परिवार और बच्चों के बीच संवाद की कमी बढ़ रही है?
 अंत नहीं… अभी बाकी है सच,,इस पूरे मामले में सच क्या है—यह जांच और समय के साथ ही सामने आएगा।
लेकिन फिलहाल एक बात तय है— यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है… असल सच अभी सामने आना बाकी है।जो कि पुलिस की निष्पक्ष जांच में ही सामने आ पाएगा!

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