Bilaspur news-"‘AIIMS डॉक्टर’बनकर करोड़ों की ठगी की साजिश करने से पहले पुलिस ने किया""नाकाम — 7 महीने से फर्जी पहचान में रह रहा था""आरोपी,,, """प्रोएक्टिव पुलिसिंग से बड़ा खुलासा,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
‘AIIMS डॉक्टर’बनकर करोड़ों की ठगी की साजिश करने से पहले पुलिस ने किया""नाकाम — 7 महीने से फर्जी पहचान में रह रहा था""आरोपी, प्रोएक्टिव पुलिसिंग से बड़ा खुलासा
बिलासपुर /रायपुर-राजधानी रायपुर में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने यह साफ कर दिया है,, कि आज के अपराधी सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि पहचान और भरोसे का भी खेल खेल रहे हैं। लेकिन इस बार चालाकी से रची गई,,, ठगी की पूरी पटकथा पुलिस की सक्रियता के आगे फेल हो गई।थाना कबीर नगर पुलिस ने ओडिशा के कटक जिले के कुख्यात आदतन अपराधी श्रीधर राउत (32 वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जो पिछले करीब 7 महीनों से रायपुर के अविनाश आशियाना कॉलोनी में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। वह खुद को कभी AIIMS का डॉक्टर, तो कभी अलग-अलग नामों से हाई-प्रोफाइल व्यक्ति बताकर एक बड़ी बैंक ठगी की तैयारी कर रहा था। कैसे रच रहा था करोड़ों की ठगी का जाल,,,जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों और बैंक अधिकारियों का भरोसा जीत रहा था।उसकी योजना थी—खुद को AIIMS डॉक्टर बताकर विश्वसनीय छवि बनाना करोड़ों की जमीन खरीदने के नाम पर बैंक से भारी लोन लेना,लग्जरी गाड़ी (फॉर्च्यूनर) के लिए भी फाइनेंस कराना,लोन पास होते ही रकम लेकर फरार हो जाना,इतना ही नहीं, वह आसपास के लोगों को भी अपने झांसे में लेकर उनसे पैसे हड़पने की फिराक में था। कई नाम, एक ही ठग,पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी ने कई फर्जी पहचान बना रखी थी—आदित्य मिश्रा, आदित्य अग्निहोत्री, डॉ. सिद्धार्थ जैसे नामों से वह अलग-अलग जगहों पर खुद को प्रस्तुत करता था।AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का नाम लेकर वह भरोसा जीतने की कोशिश करता था, क्योंकि आमतौर पर ऐसी पहचान का तुरंत सत्यापन करना आसान नहीं होता।
पहले भी कर चुका है,, करोड़ों की ठगी,,पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि श्रीधर राउत कोई नया अपराधी नहीं है।वह पहले भी ओडिशा में—
कार लोन और होम लोन के नाम पर करोड़ों की ठगी,धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और विश्वासघात के कई मामलों में जेल जा चुका है,,जेल से छूटने के बाद उसने राज्य बदला, लेकिन तरीका वही रखा।प्रोएक्टिव पुलिसिंग का बड़ा उदाहरण इस पूरे मामले की सबसे खास बात यह रही कि—
अभी कोई ठगी हुई नहीं थी,कोई पीड़ित सामने नहीं आया था
बैंक की तरफ से कोई शिकायत नहीं थी,इसके बावजूद पुलिस ने अपने सूचना तंत्र और निगरानी के जरिए इस साजिश को समय रहते पकड़ लिया।यानी यह कार्रवाई घटना के बाद नहीं, बल्कि घटना होने से पहले की गई—जो प्रोएक्टिव पुलिसिंग का मजबूत उदाहरण है। आरोपी के पास से क्या मिला,गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए—कूटरचित आधार और पैन कार्ड,फर्जी सिम कार्ड,अलग-अलग नामों के बैंक पासबुक और ATM कार्ड,3 अन्य लोगों के पासपोर्ट,जाली डिग्री और शैक्षणिक प्रमाण पत्र,,AIIMS समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों के फर्जी आईडी कार्ड,,यह साफ करता है,,, कि आरोपी लंबे समय से सुनियोजित तरीके से ठगी नेटवर्क तैयार कर रहा था। एक गिरफ्तारी, करोड़ों की बचत,अगर समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती, तो रायपुर के बैंकिंग सिस्टम और आम लोगों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता था।इस गिरफ्तारी ने न सिर्फ एक ठग को पकड़ा, बल्कि एक बड़े वित्तीय षड्यंत्र को भी खत्म कर दिया।
नागरिकों और बैंकों के लिए जरूरी सतर्कता संदेश,यह मामला एक बड़ा सबक भी देता है— किसी भी हाई-प्रोफाइल पहचान पर आंख बंद कर भरोसा न करें, सरकारी या बड़े संस्थान से जुड़े होने का दावा करने वालों का स्वतंत्र सत्यापन जरूर करें,, किराएदार रखने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कराएं,, संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत 112 या नजदीकी थाने को सूचना दें""आज के अपराधी शहर बदलते हैं, नाम बदलते हैं, पहचान बदलते हैं—लेकिन उनका तरीका नहीं बदलता।रायपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि सतर्क पुलिस और जागरूक नागरिक मिलकर ही ऐसे अंतरराज्यीय ठगी गिरोहों को रोक सकते हैं।
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