Bilaspur news-"कुष्ठ आश्रम के रहवासी दर-दर भटकने को मजबूर"" कलेक्ट्रेट व खाद कार्यालय पहुंचकर सौपा"""आवेदन,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,,
फिंगरप्रिंट नहीं, तो नहीं मिल रही सुविधाएं — कुष्ठ आश्रम के रहवासी दर-दर भटकने को मजबूर
बिलासपुर,-बिलासपुर के नयापारा स्थित कुष्ठ आश्रम के रहवासियों ने आज कलेक्टर और खाद्य अधिकारी को एक भावुक आवेदन सौंपते हुए अपनी पीड़ा बयां की। वर्षों से समाज के हाशिए पर जीवन गुजार रहे इन लोगों के सामने अब तकनीकी व्यवस्था भी बड़ी बाधा बन गई है।
आवेदन में बताया गया है कि आश्रम में रहने वाले अधिकांश लोग कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं, जिसके कारण उनके हाथों की उंगलियां या तो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं या पूरी तरह काम नहीं करतीं। ऐसे में फिंगरप्रिंट आधारित ई-केवाईसी और सत्यापन उनके लिए असंभव हो गया है।
क्या है सबसे बड़ी समस्या?सरकार की कई योजनाएं — जैसे राशन वितरण, बैंकिंग सेवाएं, गैस कनेक्शन और पेंशन — अब बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) सत्यापन पर आधारित हैं। लेकिन जिनके हाथों में उंगलियां ही नहीं बचीं, वे मशीन पर अपनी पहचान कैसे दर्ज कराएं? परिणाम क्या हो रहा है?
राशन नहीं मिल पा रहा,बैंक से पैसा निकालने में दिक्कत
गैस और अन्य जरूरी सेवाएं ठप,पेंशन तक अटक रही है,,इन हालातों ने पहले से ही संघर्ष कर रहे इन लोगों की जिंदगी और कठिन बना दी है। आवेदन में क्या मांग की गई?
आश्रम के निवासियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके लिए फिंगरप्रिंट के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे आईरिस स्कैन, ओटीपी या मैनुअल सत्यापन) लागू की जाए, ताकि वे भी सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।आवेदन में हस्ताक्षर करने वाली कृष्णा देवी ने बताया कि“हम लोग पहले ही बीमारी से जूझ रहे हैं, अब सुविधाओं के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। हाथ नहीं होने के कारण मशीन हमें पहचान नहीं पाती, जिससे हम हर सुविधा से वंचित हो रहे हैं।” प्रशासन से उम्मीद"आश्रम के लोगों को अब जिला प्रशासन से उम्मीद है कि उनकी इस गंभीर समस्या को समझते हुए जल्द कोई ठोस समाधान निकाला जाएगा, ताकि उन्हें सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिल सके।अब सवाल बड़ा ये है कि क्या तकनीक का लाभ सबके लिए है, या फिर कुछ लोग इससे पीछे छूटते जा रहे हैं?
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