Bilaspur news-"ऑफिस में घुसकर ‘बादाम फेंक’ अपमान, वीडियो बनाकर रिश्वत का आरोप.. महिला अफसर ने लगाया डिजिटल ब्लैकमेलिंग का गंभीर आरोप..
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
ऑफिस में घुसकर ‘बादाम फेंक’ अपमान, वीडियो बनाकर रिश्वत का आरोप.. महिला अफसर ने लगाया डिजिटल ब्लैकमेलिंग का गंभीर आरोप..
बिलासपुर- छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड में पदस्थ एक महिला अधिकारी ने अपने ही कार्यालय में घुसकर अपमान, मानसिक उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और सोशल मीडिया के जरिए छवि धूमिल करने का गंभीर आरोप लगाया है, मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है, शिकायतकर्ता पूनम बंजारे, सहायक स्टेट मैनेजर (संपत्ति प्रबंधन), के अनुसार 17 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 1 बजे वह अपने कार्यालय में नियमित कार्य कर रही थीं, तभी एक व्यक्ति बिना अनुमति उनके कक्ष में घुस आया। आरोप है कि उसने न सिर्फ शासकीय कार्य में हस्तक्षेप किया बल्कि फाइलों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की और अभद्र व्यवहार किया। स्थिति तब और अपमानजनक हो गई जब उसने उनकी टेबल पर बादाम फेंकते हुए तंज कसा—“इन्हें खाओ, याददाश्त बढ़ेगी”, जिससे अधिकारी को गहरा मानसिक आघात और अपमान महसूस हुआ।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बिना अनुमति रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। बाद में इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर महिला अधिकारी पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए, जिन्हें उन्होंने पूरी तरह झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताया है। उनका कहना है कि यह न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है, बल्कि डिजिटल माध्यम से दबाव बनाने और ब्लैकमेल करने का प्रयास भी है.. महिला अधिकारी ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि आरोपी के खिलाफ आपराधिक धमकी, मानहानि, महिला की गरिमा भंग करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत निजता के उल्लंघन जैसे गंभीर प्रावधान लागू होते हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को ‘डिजिटल ट्रायल’ की संज्ञा देते हुए कहा कि बिना किसी जांच के सोशल मीडिया पर एकतरफा आरोप प्रसारित कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया है।
इस मामले में उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने, सोशल मीडिया से मानहानिकारक वीडियो हटवाने और भविष्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि उनके पास वीडियो और फोटो सहित सभी जरूरी साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।
यह घटना सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा को लेकर कई सवाल खड़े करती है,साथ ही यह भी उजागर करती है कि किस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। फिलहाल मामला शिकायत के आधार पर है और पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी..
इस पूरे घटनाक्रम ने विरोध जताने के तरीके पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी भी व्यक्ति को अपनी शिकायत या असहमति दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन उसका तरीका कानून और मर्यादा के दायरे में होना चाहिए। किसी महिला अधिकारी के कार्यालय में घुसकर अभद्र व्यवहार करना, अपमानजनक टिप्पणी करना या इस तरह की हरकतों से विरोध जताना न केवल असंवैधानिक है बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को भी ठेस पहुंचाता है। यदि किसी को कार्यप्रणाली या भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत है तो उसके लिए शासन-प्रशासन में निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाएं मौजूद हैं, जिनके तहत उच्च अधिकारियों या संबंधित विभाग में विधिवत शिकायत की जा सकती है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की अपेक्षा होती है, ताकि कानून का पालन हो और किसी की गरिमा भी आहत न हो..
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