Bilaspur news-"“कहर बनकर टुटा परिवार पर हाईवा की रफ्तार ” — परिवार पर टूटा ऐसा कहर"""जिसने सब कुछ छीन लिया…
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,,
“कहर बनकर टुटा परिवार पर हाईवा की रफ्तार ” — परिवार पर टूटा ऐसा कहर, जिसने सब कुछ छीन लिया…
बिलासपुर / मस्तूरी / पचपेड़ी… दरअसल यह पूरा दर्दनाक मामला पचपेड़ी थाना अंतर्गत चिस्दा का है,,,शनिवार की दोपहर, जो आम दिनों की तरह ही शुरू हुई थी… लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह दिन एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा।ग्राम चिस्दा की उस शांत गली में 4 साल का मासूम सतीश अपने नन्हे कदमों से खेलते हुए दुनिया को महसूस कर रहा था। मासूम हंसी, छोटी-छोटी शरारतें… परिवार की खुशियों का वो छोटा सा हिस्सा, जो हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ला देता था।उसके पिता सुरेश शुक्ला, जो अपने बेटे को लेकर सपनों की दुनिया बुन रहे थे… यह सोच भी नहीं सकते थे कि कुछ ही पलों में उनका संसार उजड़ जाएगा।दोपहर करीब 2 बजे…
अचानक एक तेज रफ्तार हाइवा उस रास्ते से गुजरी।एक पल… बस एक पल…और सब कुछ खत्म हो गया।
मासूम सतीश, जो अभी जिंदगी को समझ भी नहीं पाया था, उस बेकाबू रफ्तार की चपेट में आ गया। हादसा इतना भयावह था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। चंद सेकंड में एक घर की किलकारियां सन्नाटे में बदल गईं।
जब परिजन दौड़कर पहुंचे…
तो सामने वो मंजर था, जिसे कोई भी पिता, कोई भी मां कभी देखना नहीं चाहेगा।घर में जहां कुछ देर पहले हंसी गूंज रही थी…अब वहां सिर्फ चीखें थीं… मातम था… और एक ऐसा दर्द, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।मां की आंखें अपने लाल को ढूंढ रही थीं…पिता बेसुध होकर जमीन पर बैठ गए…परिवार के लोग एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे थे… लेकिन खुद ही टूट चुके थे।यह खबर जैसे ही गांव में फैली…पूरा चिस्दा गांव शोक में डूब गया।
लोगों की आंखों में आंसू थे, लेकिन दिल में गुस्सा भी था।
“कब रुकेगी ये रफ्तार?”“कब होगी सड़कों पर जिम्मेदारी?”
इन्हीं सवालों के साथ ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। सड़क पर चक्काजाम हुआ, आवाजें उठीं… क्योंकि यह सिर्फ एक हादसा नहीं था—यह एक मासूम जिंदगी का अंत था।
प्रशासन मौके पर पहुंचा, समझाइश दी, मदद का आश्वासन दिया…
लेकिन क्या कोई मदद उस खालीपन को भर सकती है, जो सतीश के जाने से बन गया?आज उस घर का हर कोना अपने सतीश को पुकार रहा है…उसके खिलौने चुप हैं…
उसकी हंसी कहीं खो गई है…और पीछे रह गया है एक सवाल—क्या अब भी हम नहीं संभलेंगे?
एक मासूम चला गया…लेकिन उसकी यादें, उसका अधूरा बचपन… और उसके परिवार का दर्द, हमेशा जिंदा रहेगा।
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