Bilaspur news-"मानव तस्करी के जाल का पुलिस ने किया""भंडाफोड़"""मासूम जिंदगी बचाने में पुलिस की बड़ी सफलता,,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
मानव तस्करी के जाल का पुलिस ने किया""भंडाफोड़"""मासूम जिंदगी बचाने में पुलिस की बड़ी सफलता,,,,,,
बिलासपुर /रायगढ़-ज़िलें से एक रूह को कंपा देने वाले मामले का पर्दाफाश करने मे रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है,,,देने एक मासूम ज़िंदगी, धोखे का जाल, और इंसानियत को झकझोर देने वाली कहानी… लेकिन इस अंधेरे में उम्मीद की किरण बनकर सामने आई रायगढ़ पुलिस, जिसने न सिर्फ एक नाबालिग को दरिंदगी से बचाया बल्कि पूरे मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।
यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि भरोसे के टूटने और लालच की हद पार कर चुके अपराधियों की साजिश की कहानी है।
दोस्ती के नाम पर धोखा
17 वर्षीय पीड़िता, जो रायगढ़ जिले की रहने वाली है, अपने घर की परिस्थितियों से परेशान थी। 26 नवंबर 2025 को जब वह गांव के खेल मैदान में अकेली बैठी थी, तभी उसकी परिचित लड़की चमेली (परिवर्तित नाम) ने उसे सहारा देने का नाटक किया।
“काम दिलाने” का झांसा देकर उसे रायगढ़ ले जाया गया… लेकिन यह सफर उसके जीवन का सबसे डरावना मोड़ बनने वाला था।
गिरोह के चंगुल में फंसी मासूम
रायगढ़ पहुंचते ही उसे महादेव मंदिर के पास पहले से सक्रिय गिरोह के सदस्यों — बिन्दिया रात्रे, अभय यादव, चिकू खान और पूजा उर्फ बॉबी उर्फ चाची — से मिलवाया गया।
यहां भी उसे नौकरी का झूठा सपना दिखाया गया… लेकिन अगले ही दिन उसे मध्यप्रदेश के सागर ले जाया गया, जहां उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी गई।
डेढ़ लाख में “सौदा” और जबरन शादी
सागर जिले के एक गांव में आरोपी सुनील दीक्षित को डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया गया। मंदिर में जबरन शादी कराई गई और इसके बाद शुरू हुआ अत्याचार का सिलसिला।
पीड़िता के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए गए। डर, दर्द और बेबसी के बीच वह हर दिन टूटती रही… लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
हिम्मत की मिसाल: मौत जैसे हालात से भागकर लौटी
एक दिन मौका देखकर पीड़िता वहां से भाग निकली और ट्रेन से वापस रायगढ़ पहुंची। लेकिन पिता के डर के कारण घर नहीं गई।
उसी दौरान फिर से बिन्दिया के संपर्क में आई… जिसने एक बार फिर उसे झांसे में लेकर देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया। उसे अलग-अलग लोगों के पास भेजा जाता और उसकी कमाई हड़प ली जाती।
पुलिस तक पहुंची सिसकती आवाज
11 अप्रैल 2026 को आखिरकार पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
उसकी दर्दभरी आपबीती सुनते ही पुलिस हरकत में आई।
महिला पुलिस अधिकारी द्वारा संवेदनशीलता के साथ बयान लिया गया, मेडिकल परीक्षण कराया गया और तत्काल गंभीर धाराओं — अपहरण, दुष्कर्म, मानव तस्करी और पॉक्सो एक्ट — के तहत मामला दर्ज किया गया।
रायगढ़ पुलिस ने बिना देर किए टीम गठित कर दबिश दी।सबसे पहले चमेली (विधि से संघर्षरत बालिका) को हिरासत में लिया गया, जिसने पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया।जांच में सामने आया कि सभी आरोपी मिलकर नाबालिग का सौदा कर चुके थे और रकम आपस में बांट ली थी।
मुख्य खरीदार आरोपी सुनील दीक्षित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम मध्यप्रदेश रवाना हुई।
13 अप्रैल को जिला छतरपुर स्थित उसके गांव से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से:
नगद ₹7000,मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी,,बिन्दिया रात्रे
चिकू खान,पूजा उर्फ बॉबी उर्फ चाची,सुनील दीक्षित सभी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
वहीं, मुख्य आरोपी अभय यादव अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
इस पूरे मामले में रायगढ़ पुलिस की संवेदनशीलता, त्वरित कार्रवाई और रणनीतिक कार्यवाही ने एक नाबालिग की जिंदगी बचा ली।
जहां एक ओर अपराधियों ने इंसानियत को शर्मसार किया, वहीं पुलिस ने यह साबित किया कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय देर से सही, मिलता जरूर है।
यह घटना समाज के लिए चेतावनी है —
झूठे वादों और लालच के जाल में फंसाने वाले गिरोह सक्रिय हैं।
सतर्क रहें, जागरूक रहें… और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
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