Bilaspur tamilnaadu news -"चारों तरफ बिखरे खून के छींटे""शाहिद बनी दीवारे""रूह कंपा देना वाला मंज़र "बाप -बेटे चीख -चीखकर रहम की मांग रहे थे""जान की भीख""दरिंदगी हैवानियत ऐसी की दिल दहलने के साथ रूह काँप उठेगी"""आंसू छलक पड़ेंगे??? आखिर ऐसा क्यों हुआ,,,,,आया""ऐतिहासिक फैसला,,,


 शेख असलम की रिपोर्ट,,,,,
               (पिता पुत्र ओरिजिनल पिक, व ग्राफिक्स )


चारों तरफ बिखरे खून के छींटे""शाहिद बनी दीवारे""रूह कंपा देना वाला मंज़र "बाप -बेटे चीख -चीखकर रहम की मांग रहे थे""जान की भीख""दरिंदगी हैवानियत ऐसी की दिल दहलने के साथ रूह काँप उठेगी"""आंसू छलक पड़ेंगे??? आखिर ऐसा क्यों हुआ,,,,,आया""ऐतिहासिक फैसला,,, 

19 जून 2020 की वह भयानक रात " जिसने पुरे देश और सिस्टम को हिलाकर रख दिया 

“सथानकुलम केस: जब वर्दी बनी डर का नाम”

भारत /तमिलनाडु -आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी कहानी…जिसने पूरे देश को झकझोर दिया…जिसने इंसानियत को कटघरे में खड़ा कर दिया…और जिसने आखिरकार न्याय व्यवस्था को एक ऐतिहासिक फैसला देने पर मजबूर कर दिया…”स्थान : सतनकुलम,समय: जून 2020 – कोरोना लॉकडाउन,यह सच्ची कहानी है एक पिता और बेटे की…पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की…उनकी गलती क्या थी?बस इतनी कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपनी दुकान तय समय से थोड़ा ज्यादा देर तक खुली रखी थी…लेकिन यह छोटी सी बात…उनकी जिंदगी की आखिरी गलती बन गई।

                    (फाईल फोटो"पिता -पुत्र )

19 जून 2020 की रात…पुलिस आती है…दोनों को हिरासत में ले जाया जाता है… जगह – सतनकुलम पुलिस स्टेशन,,,इसके बाद…जो हुआ…उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।पूरी रात पूछताछ के नाम पर प्रताड़ना…मानवता की सारी सीमाएं लांघ दी गईं…सुबह जब दोनों को कोर्ट ले जाया गया…तो उनकी हालत सब कुछ कह रही थी…
कुछ ही दिनों में…दोनों ने दम तोड़ दिया""एक पिता…एक बेटा…दोनों की जिंदगी खत्म…और पीछे छूट गया एक बड़ा सवाल—क्या कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ेंगे?” जांच और सच्चाई:मामला बढ़ा…देशभर में गुस्सा फूटा…जांच सौंपी गई"" Central Bureau of Investigation (CBI) कोCBI की जांच में सामने आया— हिरासत में अमानवीय यातनाएं, लगातार मारपीट, सबूत मिटाने की कोशिश, CCTV फुटेज डिलीट,सच धीरे-धीरे सामने आता गया…और वर्दी के पीछे छिपी क्रूरता उजागर हो गई। 
ऐतिहासिक फैसला आया""6 अप्रैल 2026 मदुरै की अदालतमामले की सुनवाई करते हुए""न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने कहा— यह मामला “रैरेस्ट ऑफ रेयर” है यह सिर्फ हत्या नहीं… बल्कि कानून का क्रूरतम दुरुपयोग है सजा:पाने वाले कुल 10 आरोपी पुलिसकर्मी जिसमे 1 की ट्रायल के दौरान मौत हो गयी वही बाकी 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा मिली दोषियों में शामिल—जिनके नाम है,इंस्पेक्टर श्रीधर,सब-इंस्पेक्टर बालकृष्णन,रघु गणेश और अन्य पुलिसकर्मी“भारत में शायद पहली बार…इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को एक साथ फांसी की सजा सुनाई गई है…”यह फैसला सिर्फ एक केस का अंत नहीं…बल्कि एक शुरुआत है— पुलिस जवाबदेही की मानवाधिकारों की रक्षा की और सिस्टम में सुधार की मांग की"अंतिम सवाल यह उठता है कि “क्या यह फैसला काफी है?या अभी भी सिस्टम में बदलाव की जरूरत है?क्या भविष्य में ऐसी घटनाएं रुक पाएंगी?”“फिलहाल…सतनकुलम केस ने यह साफ कर दिया है— वर्दी अगर कानून तोड़ेगी… तो सजा भी सबसे सख्त होगी…”
  •  मुआवजा: अदालत ने मृतक के परिवार को 1.40 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।पीड़ित की गवाह: यह दोषसिद्धि काफी हद तक उस महिला कांस्टेबल की गवाही पर आधारित थी जिसने यातना को अपनी आंखों से देखा था।

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