Bilaspur news-" न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा द्वारा 200 सीटर "विवेकानंद सभागार"CG उच्च न्यायालय की कंप्यूटरीकरण समिति की पाँच नई परियोजनाओं का शुभारंभ,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,
बिलासपुर- न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी में 200 सीटर "विवेकानंद सभागार" एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की कंप्यूटरीकरण समिति की पाँच नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर ने आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त कि,, जब मुख्य न्यायाधीश एवं अकादमी के मुख्य संरक्षक, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने 200 सीटर विवेकानंद सभागार का उद्घाटन किया। इसी अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय की कंप्यूटरीकरण समिति की पाँच महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया, जिनका उद्देश्य न्यायिक प्रणाली की डिजिटल अधोसंरचना को सुदृढ करना एवं न्याय तक पहुँच को सुलभ बनाना है। इस पावन अवसर की गरिमा मे न्यायमूर्ति संजय के, अग्रवाल, न्यायमूर्ति पर्थ प्रतीम साहू, श्रीमती न्यायमूर्ति रजनी दुबे, न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास, न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे, न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल, न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु एवं न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद सहित उच्च न्यायालय के उपस्थिति से बढ़ी। मुख्य न्यायाधिपति. ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह भवन केवल ईंट और गारे का ढाँचा नहीं है, बल्कि न्याय, विधिक शिक्षा एवं हमारी न्याय प्रणाली के निरंतर सुदृढ़ीकरण के आदर्शों के प्रति हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है,, मुख्य न्यायाधिपति ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक ऑडियो-विजुअल सुविधाओं और उन्नत अधोसंरचना से सुसजित विवेकानंद सभागार में अकादमी के सेमिनार, सम्मेलन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। इसका उद्घाटन न्यायिक शिक्षा एवं न्यायिक अधिकारियों एवं न्याय वितरण प्रणाली के हितधारकों की क्षमता निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम है।कंप्यूटरीकरण समिति की परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए... मुख्य न्यायाधिपति ने कहा कि न्यायपालिका वर्तमान में एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रही है। आज तकनीक कोई विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है, ताकि न्याय की पहुँच, कार्यकुशलता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। उद्घाटित पाँच परियोजनाएँ इस प्रकार हैं- 1. ई-ऑफिस परियोजना 2. जिला न्यायालयों हेतु ई-प्रमाणित प्रति सुविधा 3. वर्चुअल कोर्ट (परिवहन विभाग) 4. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की नई वेबसाइट 5. उच्च न्यायालय परिसर में निःशुल्क वाई-फाई सुविधापेशे मुख्य न्यायाधिपति महोदय ने इस अवसर पर कहा कि ये नई परियोजनाएँ "डिजिटल इंडिया" के दृष्टिकोण के अनुरूप न्यायपालिका में ई-गवर्नेस को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम हैं। तकनीक का अपनाना न केवल कार्यकुशलता एवं पारदर्शिता बढ़ाता है, बल्कि न्याय को आमजन के और निकट लाता है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ मात्र तकनीकी उन्नयन नहीं हैं, बल्कि सशक्तिकरण के साधन हैं। ये हमारे इस संकल्प का प्रतिनिधित्व करती हैं कि न्यायपालिका और जनता के बीच की दूरी कम हो तथा न्याय वितरण तेज, अधिक सुलभ और नागरिक-केंद्रित हो। मुख्य न्यायाधीश ने कंप्यूटरीकरण समिति, तकनीकी दल, रजिस्ट्री अधिकारियों एवं उन सभी के प्रयासों की सराहना की जिन्होंने इन परियोजनाओं को सफल बनाने में सतत कार्य किया। समापन पर माननीय मुख्य न्यायाधीश ने आशा व्यक्त की कि अकादमी भविष्य में इस विवेकानंद सभागार उपयोग कर प्रभावी कार्यक्रम आयोजित करेगी तथा सीखने की और अधिक सशक्त संस्कृति का विकास करेगी। न्यायिक अधिकारियों, न्यायालय कर्मचारी, लीगल एड डिफेंस काउर्सिल, अधिवक्ता एवं विधि विधि क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यक्तियो की क्षमता निर्माण में अकादमी की भूमिका सदैव महत्त्वपूर्ण रही है। कार्यक्रम में प्रभारी रजिस्ट्रार जनरल एवं उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री के अधिकारी, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव एवं अन्य अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, विद्युत एवं यांत्रिक विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। स्वागत भाषण छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक द्वारा तथा आभार प्रदर्शन अतिरिक्त निदेशक द्वारा किया गया।
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