Bilaspur news-"शासकीय अस्पताल के बाद अब निज़ी अस्पताल में हंगामा: एआरसी–पीएआरसी क्लीनिक में घुसकर उत्पात, स्टाफ से अभद्रता और धमकी का आरोप?
शेख असलम की रिपोर्ट,,,
बिलासपुर में फिर अस्पताल में हंगामा: एआरसी–पीएआरसी क्लीनिक में घुसकर उत्पात, स्टाफ से अभद्रता और धमकी का आरोप??
बिलासपुर-शहर के शासकीय अस्पताल सिम्स में हाल ही में हुए हंगामे का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था? कि अब एक निजी अस्पताल में असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पात मचाने का मामला सामने आया है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद जिले के शासकीय और निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।जानकारी के अनुसार, मगरपारा रोड स्थित एआरसी–पीएआरसी क्लीनिक के संचालक डॉ. जगबीर सिंह ने थाना सिविल लाइन में लिखित शिकायत देकर कुछ असामाजिक तत्वों पर अस्पताल परिसर में घुसकर हंगामा, धमकी और जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगाया है।
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन, स्टाफ और मरीजों में दहशत का माहौल बना हुआ है।शिकायतकर्ता डॉ. जगबीर सिंह ने बताया, कि वह एआरसी–पीएआरसी नाम से नर्सिंग होम एवं डे-केयर सेंटर का संचालन करते हैं। पिछले करीब दस दिनों से वह शहर से बाहर अपने निवास पर थे। इसी दौरान 15 मई 2026 को करीब 8 से 10 लोग अस्पताल पहुंचे और वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए,, तोड़फोड़ की धमकी देने लगे।शिकायत में आरोप लगाया गया है,, कि इस समूह का नेतृत्व छत्रपाल साहू नामक व्यक्ति कर रहा था। आरोपियों ने अस्पताल में लगे, देवी-देवताओं के चित्रों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और आधे घंटे के भीतर सभी तस्वीरें हटाने की चेतावनी दी।
साथ ही अस्पताल को नुकसान पहुंचाने और स्टाफ को अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई।डॉ. सिंह के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे से शाम 4 बजे तक अस्पताल परिसर में हंगामा चलता रहा। इस दौरान वार्ड बॉय कालीचरण सूर्यवंशी के साथ जातिगत एवं जातिसूचक गालियां देकर दुर्व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
घटना से अस्पताल में मौजूद मरीज और कर्मचारी भयभीत हो गए।क्लीनिक संचालक ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज करने, अस्पताल और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया,कि वर्ष 2018 में भी उनके साथ मारपीट की घटना हो चुकी है, जिसका मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है?।फिलहाल सिविल लाइन पुलिस ने डॉक्टर की लिखित शिकायत लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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