Bilaspur news- छत्तीसगढ़ वक्त बोर्ड चेयरमैन को व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर बताया कांग्रेसियों ने"" भ्रामक आदेश जारी कर भ्रमित करने वाले डॉ. सलीम राज़ से इस्तीफा की मांग-अल्पसंख्यक कांग्रेस,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,
बिलासपुर-छत्तीसगढ़ में एक कथित “भ्रमित आदेश” को लेकर सियासत गरमा गई है। छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष और भाजपा से जुड़े नेता डॉ. सलीम राज द्वारा जारी एक पत्र को लेकर कांग्रेस अल्पसंख्यक कमेटी ने तीखी आपत्ति दर्ज की है और उनके इस्तीफे की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस नेताओं के अनुसार 19 तारीख को डॉ. सलीम राज ने अपने निजी लेटरपैड पर एक पत्र जारी किया, जिसमें कथित रूप से मुस्लिम समाज के कर्मचारियों को कार्यस्थल से एक घंटा पहले छोड़ने संबंधी आदेश का उल्लेख किया गया। पत्र में डीआईजी स्तर का संदर्भ दिए जाने से प्रशासनिक आदेश जैसा आभास हुआ।
हालांकि, 20 तारीख को मंत्रालय महानदी भवन, रायपुर के संयुक्त सचिव अनुप त्रिवेदी की ओर से ऐसे किसी भी आदेश को शासन द्वारा जारी किए जाने से साफ इनकार किया गया। शासन के इस खंडन के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक के प्रदेश उपाध्यक्ष शेख निजामुद्दीन दुलारे, शहर अध्यक्ष आसिफ खान और जिला अध्यक्ष फारुख खान ने संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर कहा कि यह कदम “भ्रम फैलाने वाला” और “विशेष समुदाय को गुमराह करने वाला” है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि निजी लेटरपैड पर प्रशासनिक आदेश जैसा पत्र जारी करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे समाज में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से मुस्लिम समुदाय में आक्रोश है और नैतिकता के आधार पर डॉ. सलीम राज को तत्काल पद से इस्तीफा देना चाहिए।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पहले भी “लॉलीपॉप राजनीति” के जरिए समुदाय विशेष को साधने की कोशिश की जाती रही है, लेकिन इस तरह के कथित भ्रामक आदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं।
भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया?
इस पूरे मामले में भाजपा या डॉ. सलीम राज की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे लेकर बहस तेज है और दोनों दलों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर भी तीखी टिप्पणियां देखने को मिल रही हैं।
प्रशासन की स्थिति
संयुक्त सचिव स्तर से खंडन के बाद स्पष्ट हो गया है कि शासन की ओर से मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पूर्व कार्यमुक्त करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया था। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि संबंधित पत्र किस अधिकार से जारी किया गया और उसका उद्देश्य क्या था।
फिलहाल, मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस अल्पसंख्यक कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आगे आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
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