Bilaspur news-"महत्वाकांक्षी योजना पर अधिकारी और ठेकेदारों की भ्रष्ट नजर से योजना चढ़ी बली पर"""जल जीवन मिशन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप,,,,

शेख असलम की रिपोर्ट,,,
 महत्वाकांक्षी योजना पर अधिकारी और ठेकेदारों की भ्रष्ट नजर से योजना चढ़ी बली पर,,

जल जीवन मिशन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप,,,,

सारंगढ़/बरमकेला -केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत “हर घर जल” पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मिशन मोड में की गई थी, ताकि निर्धारित समय सीमा में ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।
लेकिन नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बरमकेला एवं बिलाईगढ़ ब्लॉक में इस योजना के कार्यों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने इन गंभीर शिकायतों को विधानसभा में उठाने की तैयारी कर ली है।
क्या है पूरा मामला?
जल जीवन मिशन का क्रियान्वयन राज्य में पीएचई विभाग की देखरेख में किया जा रहा है। क्षेत्र में मुख्य ठेकेदारों के रूप में आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी और सुनील कुमार अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी कार्यरत हैं। आरोप है कि इन कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कार्य पेटी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से सौंप दिए, जिनमें अनुभवहीन एवं कथित रूप से भ्रष्ट ठेकेदारों को जिम्मेदारी दी गई।
विधायक के अनुसार, पेटी ठेकेदार सौरभ गर्ग (शक्ति) को बरमकेला और बिलाईगढ़ ब्लॉक के लगभग 50 गांवों का कार्य किस आधार पर दिया गया, यह जांच का विषय है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और ग्रामीणों ने लगातार घटिया निर्माण, अधूरे कार्य और फर्जी बिलिंग की शिकायत की है।
प्रशासनिक कार्रवाई भी शुरू
19 फरवरी को कलेक्टर द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक में शिकायतों का संज्ञान लिया गया।
ब्लैकलिस्ट
ग्राम पंचायत पिपरडुला एवं ठरकपुर में कार्य अधूरा छोड़ने पर ठेकेदार रामनारायण देवांगन (कटगी) को ब्लैकलिस्ट किया गया।
पेनाल्टी के साथ नोटिस
साईं ट्रेडर्स
सौमित्र कंस्ट्रक्शन
शिवम कुमार सहित अन्य
आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी को कारण बताओ नोटिस
ग्राम बगलोटा, बेलटिकरी और सरगुली में लापरवाही और शीघ्र हैंडओवर न होने के कारण नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सामने आए कथित भ्रष्टाचार के तरीके

 1. चैंबर निर्माण में गड़बड़ी
मानक साइज 5×5 फीट होना चाहिए, लेकिन छोटे आकार के चैंबर बनाकर सीमेंट-गिट्टी बचाई गई। कई जगह बिना चैंबर बनाए ही 8 हजार रुपये प्रति यूनिट की बिलिंग का आरोप।

 2. पाइपलाइन की कम गहराई
मुख्य पाइपलाइन को 1 मीटर से अधिक गहराई में डालना जरूरी है, पर कम गहराई में डालने से भारी वाहनों के दबाव में पाइप फट रहे हैं और लीकेज जारी है।
 3. घटिया व पुराने पीवीसी पाइप का उपयोग
मानक गुणवत्ता के बजाय पुराने या निम्न स्तर के पाइप लगाए जाने की शिकायत।

 4. कंपोजिट पाइपलाइन सही तरीके से नहीं दबाई गई
डेढ़ फीट की बजाय आधा फीट या उससे कम गहराई पर पाइप डालने का आरोप।

 5. सीसी रोड मरम्मत में अनियमितता
कई जगह मरम्मत किए बिना ही भुगतान निकालने का आरोप, और जहां मरम्मत हुई वहां गुणवत्ता इतनी खराब कि एक माह में ही सड़क उखड़ गई।
 6. टंकी निर्माण में लापरवाही
कम सरिया, कम सीमेंट उपयोग और बिना इंजीनियर निगरानी के निर्माण। अधिकांश टंकियों में लीकेज और टेस्टिंग नहीं होने का दावा।
7. 90% से अधिक भुगतान का आरोप
कुछ गांवों में कार्य अधूरा होने के बावजूद 90 प्रतिशत से अधिक राशि आहरित करने की शिकायत।
तकनीकी निगरानी पर भी सवाल
दो ब्लॉकों का कार्य एक ही जूनियर इंजीनियर द्वारा देखे जाने के कारण निगरानी कमजोर पड़ने का आरोप है। बिना जमीनी जांच के बिलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। पूर्व में ग्राम कर्राकोट और बुदबुदा में टंकी निर्माण में अनियमितता को लेकर संबंधित जेई को नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
विधायक का रुख
विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने स्पष्ट किया है कि वे विधानसभा में प्रश्न लगाकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, तकनीकी ऑडिट और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे। उनका कहना है कि “जल जीवन मिशन जैसी जनहितकारी योजना में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”


 सारंगढ़ जिला कागजों में राज्य के टॉप-5 प्रदर्शन वाले जिलों में दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्थिति को लेकर गंभीर शिकायतें हैं।

 एक चैंबर के लिए शासन से 8,000 रुपये स्वीकृत हैं — आरोप है कि कई जगह बिना निर्माण के ही राशि निकाली गई।

 पाइपलाइन की न्यूनतम गहराई 1 मीटर निर्धारित है — कम गहराई भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

 जल टंकियों की लैब टेस्टिंग अनिवार्य मानी जाती है — लेकिन कई जगह टेस्टिंग नहीं हुई।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, जहां यह मामला गूंज सकता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो न केवल ठेकेदारों बल्कि विभागीय अधिकारियों पर भी बड़ी कार्रवाई संभव है।
जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर जल पहुंचाना है, लेकिन यदि गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे तो मिशन की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।

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