Bilaspur news-"संघर्ष समिति का बड़ा आरोप – बिना वैधानिक अधिकार के पदाधिकारियों ने लिए फैसले""35 परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट; करोड़ों के गबन और धोखाधड़ी के मामलों की जांच की मांग तेज,,,,,

शेख असलम की रिपोर्ट,,,,,
डायोसिस में सत्ता संग्राम! प्राचार्य निलंबन, स्कूल में ताला और करोड़ों के गबन के आरोपों से मचा बवाल,,,,,

संघर्ष समिति का बड़ा आरोप – बिना वैधानिक अधिकार के पदाधिकारियों ने लिए फैसले, 35 परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट; करोड़ों के गबन और धोखाधड़ी के मामलों की जांच की मांग तेज

बिलासपुर/रायपुर-छत्तीसगढ़ डायोसिस से जुड़े स्कूलों में प्राचार्यों और कर्मचारियों के निलंबन, स्कूल परिसरों में ताला लगाने और कथित अवैध प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ डायोसिस बचाओ संघर्ष समिति ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि स्वयं को पदाधिकारी बताने वाले कुछ लोगों द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग कर कर्मचारियों और शिक्षकों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की जा रही है।
समिति के अनुसार छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन के अंतर्गत संचालित बर्जेस इंग्लिश स्कूल बिलासपुर, सालेम स्कूल रायपुर, रेम्बो मेमोरियल स्कूल मुंगेली सहित कई शिक्षण संस्थानों में वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों और प्राचार्यों को कथित रूप से अवैधानिक तरीके से निलंबित और बर्खास्त किया गया है। संघर्ष समिति का दावा है कि यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई जो अपने अधिकारों और हितों के लिए आवाज उठा रहे थे।
समिति ने आरोप लगाया है कि डायोसिस और शिक्षा समिति के चुनाव को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। उनका कहना है कि जिन लोगों की समिति को पूर्व में निरस्त और भंग किया जा चुका था, उन्हीं व्यक्तियों ने पुनः स्वयं को पदाधिकारी घोषित कर प्रशासनिक निर्णय लेना शुरू कर दिया। संघर्ष समिति का दावा है कि फर्म एवं संस्थान द्वारा धारा-27 के तहत अभी तक पदाधिकारियों की प्रमाणित सूची जारी नहीं की गई है, इसलिए वर्तमान में पदाधिकारी होने का दावा करने वाले लोगों को प्रशासनिक निर्णय लेने का वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसके बावजूद कथित पदाधिकारियों द्वारा स्कूलों के लेटरपैड का उपयोग करते हुए शिक्षकों, प्राचार्यों और कर्मचारियों के निलंबन एवं बर्खास्तगी के आदेश जारी किए गए। संघर्ष समिति ने इन आदेशों को पूरी तरह अवैध, शून्य और धोखाधड़ीपूर्ण बताया है।
विवाद का सबसे बड़ा केंद्र बर्जेस इंग्लिश स्कूल बिलासपुर बना हुआ है। समिति का आरोप है कि स्कूल की प्राचार्य निशिता हंसा दास को नियमों के विपरीत निलंबित किया गया और उनके कार्यालय में ताला लगाकर जबरन कब्जा करने की कोशिश की गई। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया है कि यदि संबंधित समिति वैधानिक रूप से अधिकृत है तो फिर स्कूल परिसर में इस प्रकार की कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी।
समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ पूर्व में धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है तथा वे न्यायालय से सशर्त जमानत पर हैं। इसके अलावा बर्जेस और सालेम स्कूल से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन के आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।
संघर्ष समिति ने दावा किया है कि डायोसिस से जुड़े एक पदाधिकारी के खिलाफ मिशन की जमीन बेचने और धन के कथित दुरुपयोग के मामले में न्यायालय द्वारा एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति ने पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
समिति का कहना है कि इन घटनाओं के कारण करीब 35 परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है और कर्मचारियों के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। मामले को लेकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, कलेक्टर तथा अन्य संबंधित विभागों को शिकायत भेजी गई है।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर डायोसिस प्रशासन या आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी आरोप जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं। हालांकि डायोसिस से जुड़े शिक्षण संस्थानों में चल रहा यह विवाद अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस मामले में नए खुलासों तथा प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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