Bilaspur news-"हाउसिंग सोसायटियां हुईं"'संगठित, बिल्डरों की मनमानी और अधूरी सुविधाओं के खिलाफ खोला मोर्चा""नई उपविधियों से रहवासियों को मिले""मजबूत अधिकार,,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
बिलासपुर की हाउसिंग सोसायटियां हुईं संगठित, बिल्डरों की मनमानी और अधूरी सुविधाओं के खिलाफ खोला मोर्चा; नई उपविधियों से रहवासियों को मिले मजबूत अधिकार
बिलासपुर-शहर में तेजी से बढ़ रही,,,आवासीय कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स के बीच रहवासियों की समस्याओं को लेकर अब हाउसिंग सोसायटियां एकजुट हो गई हैं। बिलासपुर की 16 आवासीय समितियों ने संयुक्त मंच बनाकर कलेक्टर के समक्ष विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए,,,बिल्डरों की मनमानी, अधूरी सुविधाओं, रखरखाव शुल्क की वसूली, अवैध निर्माण और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।
सोसायटी प्रतिनिधियों का आरोप है कि बिल्डर आकर्षक ब्रोशर दिखाकर गार्डन, क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, फायर सेफ्टी, सड़क, प्रकाश व्यवस्था जैसी अनेक सुविधाओं का वादा करते हैं, लेकिन निर्माण पूर्ण होने के बाद अधूरी सुविधाओं के साथ ही मकान और फ्लैट्स का हस्तांतरण कर दिया जाता है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते हैं, जिससे रहवासियों को वर्षों तक समस्याओं का सामना करना पड़ता है.....
कलेक्टर से की गई प्रमुख मांगें,,,,
आवासीय समितियों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी कॉलोनी या अपार्टमेंट को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने से पहले भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया जाए और उसकी प्रति संबंधित सोसायटी को भी उपलब्ध कराई जाए। फायर सेफ्टी सिस्टम की नियमित जांच और फायर ऑडिट सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि बिलासपुर की अधिकांश कॉलोनियों का हस्तांतरण अब तक सोसायटियों को नहीं किया गया है, जिससे बिल्डरों का हस्तक्षेप लगातार बना रहता है। साथ ही सभी आवासीय समितियों को सहकारी समिति अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत करने और बिलासपुर में रेरा (RERA) की शाखा खोलने की मांग भी की गई है ताकि विवादों के समाधान के लिए रायपुर का चक्कर न लगाना पड़े....
रखरखाव शुल्क और अवैध निर्माण बना बड़ी समस्या
सोसायटियों ने बताया कि कई परिसरों में छह माह से लेकर तीन वर्ष तक का मेंटेनेंस शुल्क बकाया है। खाली पड़े या बिल्डर के स्वामित्व वाले फ्लैट्स का रखरखाव शुल्क भी जमा नहीं किया जा रहा है। इसके लिए राजस्व विभाग की सहायता से वसूली के अधिकार देने की मांग की गई है।
इसके अलावा कॉमन एरिया में बिना अनुमति किए जा रहे अवैध निर्माणों को लेकर भी चिंता जताई गई है। समितियों ने पुलिस और नगर निगम को ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी करने की मांग की है,,,,
किरायेदारों की KYC और NOC व्यवस्था की मांग
सुरक्षा के दृष्टिकोण से सोसायटियों ने मांग की है कि किसी भी मकान या फ्लैट को किराये पर देने से पहले किरायेदार का KYC निकटस्थ थाने में जमा करना अनिवार्य किया जाए तथा सोसायटी की अनापत्ति (NOC) भी ली जाए। इसी तरह फ्लैट या मकान के विक्रय से पूर्व सोसायटी का NOC लेना भी अनिवार्य किया जाए,,
नई उपविधियों से रहवासियों को मिला कानूनी संरक्षण
इस बीच राज्य शासन द्वारा 20 मई 2026 को आवासीय सहकारी सोसायटियों के लिए नई उपविधियां लागू की गई हैं, जिन्हें आवासीय मंच ने रहवासियों के हित में बड़ा कदम बताया है,,,,,
नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत फ्लैट या मकान मालिक को सोसायटी का सदस्य बनना अनिवार्य होगा। मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं करने पर विलंब शुल्क लगाया जा सकेगा। किराये या लीज पर मकान देने से पहले सोसायटी और थाने को सूचना देना जरूरी होगा।
उपविधियों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मूल भवन संरचना में बिना अनुमति कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। किसी सदस्य की लापरवाही से भवन या अन्य निवासियों की संपत्ति को नुकसान होने पर उसकी भरपाई संबंधित सदस्य को करनी होगी,,,,
बकाया शुल्क वसूली के मिले अधिकार
नई उपविधियों का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि मेंटेनेंस शुल्क जमा नहीं करने वाले फ्लैट मालिक, किरायेदार या लीजधारक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करते हुए चल-अचल संपत्ति से भी वसूली की जा सकेगी। इससे वर्षों से लंबित रखरखाव राशि की समस्या के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है,,,,,
कलेक्टर ने दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश
मंच के प्रतिनिधियों के अनुसार कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त को किसी एक सोसायटी का स्वतंत्र निरीक्षण कर बिल्डर द्वारा घोषित सुविधाओं की जांच करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप हुआ है या नहीं। वहीं बकाया मेंटेनेंस शुल्क वसूली के मामलों में सहकारिता विभाग को आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया है,,,,
एकजुट होकर अधिकारों की लड़ाई
आवासीय सहकारी मंच के कोषाध्यक्ष डॉ. दिनेश पाण्डेय ने कहा कि बिलासपुर में आवासीय परियोजनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन रहवासियों को उनके अधिकारों और सहकारी समितियों की भूमिका की पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसी उद्देश्य से विभिन्न सोसायटियों को एक मंच पर लाकर प्रशासन और शासन तक उनकी समस्याएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है,,,,
बिलासपुर की हाउसिंग सोसायटियों द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल स्थानीय नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में तेजी से विकसित हो रही आवासीय परियोजनाओं की वास्तविक तस्वीर सामने लाते हैं। यदि प्रशासन, नगर निगम, सहकारिता विभाग, पुलिस और बिल्डरों के बीच समन्वय स्थापित होता है तो रहवासियों को बेहतर सुविधाएं, पारदर्शिता और सुरक्षित आवासीय वातावरण मिल सकेगा। यह पहल भविष्य में छत्तीसगढ़ की अन्य आवासीय समितियों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।
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