Bilaspur news-"खानदान-ए-मुस्तफा और बीबी फातिमा की सीरत से बेटियों के सम्मान का पैगाम, सूफी संतों की शिक्षाओं पर भी हुई"""रोशन तकरीर,,,,,

शेख असलम की रिपोर्ट,,,,,
खानदान-ए-मुस्तफा और बीबी फातिमा की सीरत से बेटियों के सम्मान का पैगाम, सूफी संतों की शिक्षाओं पर भी हुई रोशन तकरीर

बिलासपुर- मोहर्रम के अवसर पर उसकी देन कमेटी द्वारा आयोजित मजलिस एवं तकरीर कार्यक्रम के तहत चौथे दिन धार्मिक एवं सामाजिक विषयों पर प्रेरणादायक बयान पेश किए गए। एक ओर दिल्ली से पधारे मुख्य वक्ता प्रोफेसर मौलाना मुख्तार अशरफ ने खानदान-ए-मुस्तफा, हजरत खदीजतुल कुबरा, हजरत अली और बीबी फातिमा ज़हरा की सीरत पर प्रकाश डालते हुए बेटियों के सम्मान और महिलाओं की बेहतर परवरिश का संदेश दिया, वहीं रामजनी बाबा शेड में अलीमा फाजिला महशर जहाँ ने सूफी संतों की शिक्षाओं और महिलाओं के अखलाक पर विस्तृत तकरीर की।
कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना मजहर साहब की तिलावत-ए-कुरआन और हाफिज मुस्तकीम द्वारा नात-ए-पाक से हुई। इसके पश्चात प्रोफेसर मौलाना मुख्तार अशरफ ने कहा कि इस्लाम की बुनियाद कुर्बानी, सच्चाई और इंसानियत पर कायम है। उन्होंने हजरत खदीजा (रज़ि.) की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया रसूल-ए-अकरम हजरत मोहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का विरोध कर रही थी, तब हजरत खदीजा ने हर मुश्किल घड़ी में आपका साथ दिया और अपने माल, ताकत तथा मोहब्बत से इस्लाम की मजबूती में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि हजरत अली और बीबी फातिमा का निकाह पूरी इंसानियत के लिए आदर्श है, जो आपसी सम्मान, मोहब्बत, सादगी और तकवा की मिसाल पेश करता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया बेटियों के अधिकारों और सम्मान की बात करती है, जबकि 1400 वर्ष पूर्व रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपनी बेटी हजरत फातिमा को जो सम्मान दिया, वह पूरी मानवता के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।प्रो. अशरफ ने कहा कि जब बीबी फातिमा रसूलुल्लाह की बारगाह में आती थीं तो नबी-ए-करीम अपनी जगह से खड़े हो जाते, उनका हाथ चूमते और उनका सम्मान करते थे। इससे यह शिक्षा मिलती है कि बेटियां रहमत होती हैं और उनका सम्मान करना ईमान का हिस्सा है। उन्होंने महिलाओं और बेटियों की शिक्षा, परवरिश और दीन की सही तालीम पर जोर देते हुए कहा कि समाज की तरक्की बेटियों को सम्मान और बेहतर अवसर देने से ही संभव है।उन्होंने कर्बला के पैगाम का उल्लेख करते हुए कहा कि बीबी जैनब (रज़ि.) और अहलेबैत की महिलाओं ने सब्र, हिम्मत और दीन की हिफाजत का ऐसा उदाहरण पेश किया जो कयामत तक इंसानियत का मार्गदर्शन करता रहेगा।
इसी कड़ी में रमजनी बाबा शेड में आयोजित महिलाओं के विशेष कार्यक्रम में अलीमा फाजिला महशर जहाँ ने हजरत निजामुद्दीन औलिया, अमीर खुसरो और बू अली शाह कलंदर की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हजरत निजामुद्दीन औलिया की जिंदगी इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देती है, जबकि अमीर खुसरो ने अपने कलाम और अदब के जरिए प्रेम, संस्कृति और आध्यात्मिकता को नई पहचान दी। बू अली शाह कलंदर की शिक्षाएं इंसान को अहंकार त्यागकर अल्लाह की इबादत और मानव सेवा की ओर प्रेरित करती हैं।
महशर जहाँ ने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को सम्मान, अधिकार और ऊंचा दर्जा प्रदान किया है। उन्होंने महिलाओं से अपने अखलाक, पर्दा, तालीम और पारिवारिक जिम्मेदारियों को समझते हुए समाज के लिए आदर्श बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक नेक औरत पूरे परिवार की तरबियत का केंद्र होती है और उसके अच्छे अखलाक से समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।

उन्होंने महिलाओं को दीन के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा हासिल करने की भी नसीहत दी ताकि वे अपने परिवार और समाज की बेहतर रहनुमाई कर सकें। तकरीर के दौरान उन्होंने हजरत फातिमा ज़हरा की सीरत का जिक्र करते हुए सब्र, सादगी और पाकीजगी को महिलाओं के लिए आदर्श बताया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं एवं अकीदतमंदों ने शिरकत कर तकरीरों को गौर से सुना और दीन, अखलाक तथा इंसानियत के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर फरहान बक्स, हसनैन अली, जियाउद्दीन प्यारे, इकराम भईया, अदनान अली, शाहिद लालखादान, शाहिल शेख, अब्दुल कलीम (पत्रकार), मोहम्मद अली, अब्दुल रज्जाक बड़े, इंसान अली बब्बू, आदिल भाई, असद, अब्दुल रशीद, रिजवान शानू, ज़ैद, वसीम बक्स, हाजी कादिर, हाजी निशार, हाजी जफर, खालिद भाई (सिटी मैन टेलर), प्यारू भाई, अबरार भाई, आरिफ बेग, शेख निजामुद्दीन, मिर्जा वसीम बेग शबाब अली, शाहिद सहित कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य एवं शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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