"""8 news cg -""IG""राम गोपाल गर्ग के निर्देश पर"""अपराधियों की निगरानी होगी और सख्त"""""एक गुंडा-एक जवान’""नीति लागू,"" साथ ही मानवधिकारों का सम्मान करते हुए होगी"""कार्रवाई,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,
IG""राम गोपाल गर्ग के निर्देश पर"""अपराधियों की निगरानी होगी और सख्त"""""एक गुंडा-एक जवान’""नीति लागू,"" साथ ही मानवधिकारों का सम्मान करते हुए होगी"""कार्रवाई,,,,
गुंडा और निगरानी बदमाशों की सघन चेकिंग के लिए जारी हुईं एसओपी, सक्रिय अपराधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश,,,,
रायगढ़ /कोरबा /जांजगीर /चांपा /सक्ति /GPM/मुंगेली /बिलासपुर-बिलासपुर रेंज में अपराधों की रोकथाम और प्रिवेंटिव पुलिसिंग को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में मंगलवार को उच्चस्तरीय ऑनलाइन पुलिस कार्यशाला आयोजित की गई। आईजी कार्यालय बिलासपुर रेंज के मीटिंग हॉल से आयोजित कार्यशाला में रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधिकारी, एसडीओपी और थाना प्रभारी सहित करीब 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। कार्यशाला में गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की सघन चेकिंग, रिकॉर्ड के बेहतर संधारण और सक्रिय अपराधियों पर प्रभावी निगरानी को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।
कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक सक्ती प्रफुल्ल ठाकुर ने गुंडा एवं निगरानी बदमाशों के संबंध में अपने अनुभव साझा करते हुए प्रिवेंटिव पुलिसिंग और बेसिक पुलिसिंग को मजबूत करने पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने अपराधियों के वर्गीकरण, उनकी गतिविधियों की निगरानी और पुलिस रिकॉर्ड को अद्यतन रखने की प्रक्रिया की जानकारी दी।
अपराधियों का रिकॉर्ड होगा अपडेट
कार्यशाला में पुलिस रेगुलेशन के पैरा 855 से 860 के तहत आदतन चोरों एवं लुटेरों को ए-क्लास निगरानी बदमाश तथा मारपीट, रंगदारी और भू-माफिया जैसी गतिविधियों में संलिप्त अपराधियों को बी-क्लास गुंडा के रूप में वर्गीकृत करने पर जोर दिया गया। ऐसे अपराधियों का फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खातों सहित पूरा बायोडाटा अद्यतन रखने और गंभीर मामलों में गैंग हिस्ट्री शीट तैयार करने के निर्देश दिए गए।
‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति पर जोर
सक्रिय बदमाशों की निगरानी के लिए ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत प्रत्येक चिन्हित बदमाश की गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी को सौंपी जाएगी। जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा अपराध करने वाले आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई तेज करने के साथ ही संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जमानत निरस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
इसके अलावा BNSS की धारा 110, बाउंड ओवर, जिला बदर और PIT-NDPS जैसे प्रभावी कानूनी प्रावधानों का नियमानुसार इस्तेमाल करने तथा फरार आरोपियों को तकनीकी माध्यमों से ट्रैक करने के निर्देश दिए गए।
सरप्राइज चेकिंग की व्यवस्था होगी प्रभावी
गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की चेकिंग का समय पूर्व निर्धारित न रखते हुए अचानक और अनिश्चित समय पर जांच करने पर जोर दिया गया। पुलिस टीमों की सुरक्षा से जुड़ी एसओपी का पालन करने तथा बदमाशों के रहन-सहन और आय के स्रोत का सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए।
रिकॉर्ड और बीट पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर
कार्यशाला में रोजनामचा में पुलिसकर्मियों की रवानगी और वापसी की क्रॉस-एंट्री अनिवार्य करने के साथ ही रजिस्टर-7, परवाना फाइल और ए-टू-जेड अल्फाबेटिकल रजिस्टर को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए। बीट पुलिसिंग को प्रभावी बनाने के लिए ए, बी और सी नोटबुक के पुनरुद्धार तथा ग्राम अपराध नोटबुक (VCNB) को अपडेट रखने पर भी जोर दिया गया।
अंतरराज्यीय और अंतरजिला अपराधियों के संबंध में BC Roll, SS Roll और Cri-MAC के माध्यम से सूचनाओं के आदान-प्रदान को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। गांवों में कोटवारों, प्रतिष्ठित नागरिकों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों से लगातार संपर्क बनाए रखने तथा मुसाफिर रजिस्टर और कोटवारों की रोस्टर हाजिरी को व्यवस्थित रखने पर भी जोर दिया गया।
मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए होगी कार्रवाई
आईजी राम गोपाल गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए होनी चाहिए। विमुक्त जनजातियों, पिछड़े वर्गों अथवा नाबालिगों के खिलाफ बिना उचित आधार के मनमानी कार्रवाई नहीं की जाए। सुप्रीम कोर्ट के संबंधित निर्देशों और निजता के अधिकार का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
सुधर चुके लोगों को निगरानी सूची से हटाने पर जोर
कार्यशाला में यह भी निर्देश दिया गया कि जो लोग लंबे समय से अपराध छोड़कर सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उन्हें नियमानुसार निगरानी सूची से हटाया जाए। पुलिस का फोकस केवल सक्रिय और संभावित अपराधियों पर रहे, ताकि संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जा सके। राष्ट्रीय पर्वों और प्रमुख त्योहारों से पहले थानों में गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की परेड कराकर उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सख्त हिदायत देने के निर्देश भी दिए गए।
कार्यशाला के समापन पर आईजी राम गोपाल गर्ग ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि वे स्वयं इन व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें और दिए गए निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं। उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव पुलिसिंग का प्रभावी क्रियान्वयन पुलिस, कोटवार, पुलिस मित्र और आम जनता के बीच बेहतर समन्वय एवं सीधे संवाद से ही संभव है। पुलिस का लक्ष्य सक्रिय अपराधियों पर प्रभावी निगरानी रखते हुए अपराध की पुनरावृत्ति को रोकना और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाना है।
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