Bilaspur news-बिलासपुर के रासेयो चित्रकारों ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के जीवन गाथा को किया गया"चित्रित,

शेख असलम की रिपोर्ट,
बिलासपुर के रासेयो चित्रकारों ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के जीवन गाथा को किया गया"चित्रित,
               
बिलासपुर -संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में दिनांक 18- 19- 20 अप्रैल 2025 को लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की त्रि शताब्दी जयंती के अवसर पर प्रदेश स्तरीय कार्यशाला का आयोजन बुढेश्वर मंदिर बूढ़ा तालाब रायपुर में किया गया । इस कार्यशाला में चित्रनिर्माण सामग्री कैनवास , कलर , ब्रश तथा पेलट, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर , संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार SCZCC के सौजन्य से प्राप्त हुई । भारतीय इतिहास की कुशल शासिका पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी के समाज सेवी कार्यो को उद्धृत करने हेतु एवं उनके विशाल व्यक्तित्व से प्रदेश एवं देश के समस्त नागरिकों को प्रेरणा प्राप्त हो इस उद्देश्य से चित्रमाला का निर्माण किया गया ।
            इसकी पूर्व तैयारी के रूप में बिलासपुर के वरिष्ठ चित्रकार, दिलीप पात्रिकर एवं संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के प्रांतीय महामंत्री, हेमन्त माहुलीकर कोरबा ने उनकी जीवनी का अध्ययन कर 55 प्रसंग निर्धारित किये । तत्पश्चात चित्रकला संयोजक, चंद्रशेखर देवांगन बिलासपुर , सहसंयोजक, भोजराज धनगर रायपुर और वरिष्ठ चित्रकार, मनोज श्रीवास्तव रायगढ़ के साथ इन विषयों पर विस्तृत चर्चा कर इसे अंतिम रूप प्रदान किया गया ।
 संस्कार भारती छत्तीसगढ़ की ओर से दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर के निदेशक श्रीमती आस्था कारलेकर को प्रस्ताव दिया गया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार करते हुए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के नियमों के तहत सामग्री उपलब्ध कराने की सहमति प्रदान की ।
मोना केवट , रासेयो कार्यक्रम ‌अधिकारी    ,‌पीएएस ने युद्ध कौशल हाथी पर बैठी अहिल्या धनुष तीर धनुष लेकर अंग्रेज सी से युद्ध का दृश्य बनाया ।वही कामिनी साहू अहिल्याबाई के पुत्र हिमालय राव का जन्म सन 1745। हर्ष रजक   ससुराल में अहिल्या शिव आराधना करती हुई । वंशिका मिश्रा महालक्ष्मी मंदिर कोल्हापुर का निर्माण । चंदन कुमार खंडेराव और अहिल्या का एक साथ  युद्धअभ्यास,। आंचल यादव अहिल्याबाई की पुत्री मुक्ताबाई का जन्म सन 1745 कलाकारों ने कैनवास पर अपनी कल्पना शक्ति को कैनवास पर उतारा बिलासपुर चित्रकारों की कार्यों की सराहना की गई!
          प्रदेश के अंतिम छोर के जिले बलरामपुर - रामानुजगंज से लेकर बस्तर तक चित्रकारों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें कार्यशाला में आमंत्रित किया गया । चित्रकला में उपाधि प्राप्त युवा कलाकार सहित प्रदेश के वरिष्ठ व अनुभवी कलाकारों में से 18 महिला एवं 32 पुरुष चित्रकारों ने उक्त कार्यशाला में भाग लिया ।

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