Bilaspur news-" जिस विश्वविद्यालय के कंधे पर नियमों का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी" उसी विश्वविद्यालय ने नियमों को दरकिनार कर,,,बिना टेंडर खोले दिया"चहते ठेकेदार को काम,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,
अटल यूनिवर्सिटी में टेंडर खुलने से पहले ही डोम/टेंट का काम शुरू!—नियमों को ठेंगा, जिम्मेदार चुप
बिलासपुर-अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर की प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजनों के लिए लगाए जाने वाले डोम/टेंट से संबंधित कार्य का टेंडर खुले बिना ही काम शुरू कर दिए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना न केवल वित्तीय नियमों की अनदेखी को दर्शाती है, बल्कि पूरे खरीद-प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर संदेह खड़ा करती है?टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले शुरू हुआ
काम,,?विश्वविद्यालय में टेंट/डोम लगाने का काम सामान्यतः तकनीकी बोली, वित्तीय बोली, पात्रता परीक्षण और आदेश जारी होने जैसी प्रक्रियाओं के बाद शुरू होता है। लेकिन इस मामले में सारी औपचारिकताओं को दरकिनार करते हुए सीधे साइट पर काम शुरू कर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जिस कार्य के लिए अभी टेंडर की फाइलें खोली भी नहीं गई थीं,?वही काम पहले ही किसी ठेकेदार से करवा दिया गया। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है,, कि या तो ठेकेदार पहले से “फिक्स” था या फिर पूरी निविदा प्रक्रिया महज़ एक औपचारिकता बनकर रह गई।जिम्मेदार अधिकारी दे रहे टालमटोल भरे जवाब,जब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से बात करने की कोशिश की गई, तो किसी भी अधिकारी ने स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से परहेज किया।
कुछ अधिकारी इसे “जल्दबाजी में कराया गया आवश्यक कार्य” बताने की कोशिश करते दिखे, जबकि अन्य ने विभागीय प्रक्रिया का हवाला देकर बात टाल दी। विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी ने ही मामले को और संदिग्ध बना दिया है।छात्रों और कर्मचारियों में नाराज़गी विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों में इस मनमानी को लेकर नाराज़गी है। उनका कहना है कि जिस संस्थान से पारदर्शिता, अनुशासन और नियमों के पालन की उम्मीद की जाती है, उसी में यदि नियम ताक पर रखे जाएंगे, तो आम जनता कैसे भरोसा करेगी?एक छात्र नेता ने कहा—“जब टेंडर खोला ही नहीं गया था, तो कौन सा ठेकेदार कैसे आकर काम शुरू कर देता है? यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।”क्या होगी जाँच? या मामला दब जाएगा?विशेष बात यह है कि विश्वविद्यालय पहले भी कई प्रशासनिक विवादों की वजह से सुर्खियों में रहा है। अब यह नया प्रकरण इन विवादों की लंबी सूची में और एक अध्याय जोड़ सकता है।हालांकि इस मामले में जाँच की मांग उठने लगी है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जाँच नहीं की गई तो यह मामला भी अन्य विवादों की तरह धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा।छवि सुधारने के लिए कठोर कार्रवाई आवश्यक,,विशेषज्ञ मानते हैं कि विश्वविद्यालय की छवि पहले से ही कई कारणों से प्रभावित रही है। ऐसे में नियमों के उल्लंघन से जुड़े इस प्रकरण पर तत्काल और पारदर्शी कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि छात्रों, कर्मचारियों और आम जनता का भरोसा बरकरार रह सके।
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