""""8 news cg -""""अब आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए: अरपा पार को पृथक नगर निगम बनाने की मांग को लेकर 1 सितंबर से आमरण अनशन,,,,,
शेख असलम की रिपोर्ट,,,,,
अब आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए: अरपा पार को पृथक नगर निगम बनाने की मांग को लेकर 1 सितंबर से आमरण अनशन,,,,,
बिलासपुर-अरपा पार क्षेत्र को पृथक नगर निगम बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। वर्षों से विकास और बेहतर नगरीय सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे क्षेत्रवासियों ने अब आश्वासन के बजाय ठोस निर्णय की मांग उठाई है। नागरिक सुरक्षा मंच ने इस मुद्दे को लेकर बिलासपुर प्रेस क़्लब मे वार्ता के दौरान आंदोलन का ऐलान करते हुए 1 सितंबर 2026 से रामसेतु, सरकंडा में आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की है। मंच का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि अरपा पार क्षेत्र की जनता के अधिकार, सम्मान और विकास के लिए किया जा रहा है।
नागरिक सुरक्षा मंच के अनुसार, अरपा पार की जनता पिछले करीब 30 वर्षों से पृथक नगर निगम की मांग को लेकर संघर्ष कर रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान शहर विधायक के घोषणा पत्र में भी इस मांग से जुड़ा वादा किए जाने का हवाला देते हुए मंच अब उस वादे को जमीन पर उतारने की मांग कर रहा है।
22 वार्डों के लिए अलग नगर निगम की मांग
वर्तमान में बिलासपुर नगर निगम में अरपा पार क्षेत्र के 22 वार्ड शामिल हैं। मंच का तर्क है कि क्षेत्र लगातार तेजी से विकसित और विस्तारित हो रहा है तथा आबादी बढ़ने के साथ स्थानीय जरूरतें भी बढ़ रही हैं। ऐसे में अरपा पार के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक हो गई है।
मंच का कहना है कि यदि अरपा पार को पृथक नगर निगम का दर्जा मिलता है तो क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप अलग विकास योजना, बजट और प्राथमिकताएं तय की जा सकेंगी। इससे सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है।
19 ग्राम पंचायतों को निगम में शामिल करने के बाद भी सवाल
मंच ने वर्ष 2019 में बिलासपुर नगर निगम के विस्तार के दौरान 19 ग्राम पंचायतों को निगम सीमा में शामिल किए जाने का मुद्दा भी उठाया है। मंच का सवाल है कि नगर निगम में शामिल किए जाने के बाद क्या इन क्षेत्रों को अपेक्षित नगरीय सुविधाएं मिल पाईं?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि केवल प्रशासनिक सीमा बढ़ा देने से किसी क्षेत्र का वास्तविक शहरी विकास नहीं होता। शहर का स्वरूप तभी मजबूत होता है, जब लोगों को बेहतर सड़क, नाली, पानी, स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध हों। इसी आधार पर मंच पृथक नगर निगम की मांग को क्षेत्र के समग्र विकास से जोड़ रहा है।
50 साल से अधिक समय में बेहतर सार्वजनिक गार्डन नहीं
अरपा पार क्षेत्र में सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति को लेकर मंच ने सार्वजनिक उद्यान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। मंच के मुताबिक, 50 वर्षों से अधिक समय बीतने के बावजूद क्षेत्र में ऐसा प्रमुख सार्वजनिक गार्डन विकसित नहीं हो पाया, जहां बच्चे खेल सकें और बुजुर्ग आराम से समय बिता सकें।
मंच का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर उद्यान की सुविधा के लिए कम्पनी गार्डन जैसे दूसरे इलाकों का रुख करना पड़ता है। उसके अनुसार यह केवल गार्डन का मुद्दा नहीं है, बल्कि अरपा पार को विकास की प्राथमिकताओं में अपेक्षित स्थान नहीं मिलने का उदाहरण है।
जनता को चाहिए अलग और जवाबदेह प्रशासन
नागरिक सुरक्षा मंच का कहना है कि अरपा पार की जनता को ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था चाहिए, जो स्थानीय समस्याओं और जरूरतों पर सीधे केंद्रित हो। पृथक नगर निगम बनने से क्षेत्र के लिए अलग विकास योजना, बजट और जवाबदेही निर्धारित की जा सकेगी।
मंच ने स्पष्ट किया है कि उसकी मांग किसी दूसरे क्षेत्र से विकास छीनने की नहीं है। उसका उद्देश्य अरपा पार को उसके हिस्से का विकास, अधिकार और सम्मान दिलाना है।
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात, शासन को पत्र भेजे जाने का दावा
मंच के संयोजक अमित तिवारी ने हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर अरपा पार को पृथक नगर निगम बनाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने और चर्चा करने की जानकारी दी है।
मंच का दावा है कि केंद्रीय मंत्री ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के शहरी विकास मंत्रालय को इस विषय के शीघ्र निराकरण के लिए पत्र लिखा है। हालांकि, मंच का आरोप है कि इसके बाद भी राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में अब तक कोई ठोस और समयबद्ध निर्णय सामने नहीं आया है।
1 सितंबर से आमरण अनशन का ऐलान
नागरिक सुरक्षा मंच ने अब आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने की घोषणा की है। मंच की ओर से कहा गया है कि 1 सितंबर 2026 से रामसेतु, सरकंडा में आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। मंच का कहना है कि जब तक अरपा पार को पृथक नगर निगम बनाने की मांग पर ठोस और समयबद्ध निर्णय नहीं होता, तब तक लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
मंच ने अपना संदेश स्पष्ट शब्दों में रखा है—“अब वादा नहीं, हिसाब चाहिए। अब आश्वासन नहीं, काम चाहिए। अब घोषणा नहीं, निर्णय चाहिए। अब इंतजार नहीं, पृथक नगर निगम चाहिए।”
मंच के मुताबिक, अरपा पार नगर निगम की मांग महज प्रशासनिक पुनर्गठन का विषय नहीं है, बल्कि क्षेत्र की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। अब देखना होगा कि 1 सितंबर से प्रस्तावित आंदोलन के बाद शासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और अरपा पार की जनता को लंबे समय से चले आ रहे इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय मिल पाता है या नहीं।
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