""""8 news cg -"""""जुलूस-ए-मुहम्मदी ﷺ : मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ के साथ""""हमारी जिम्मेदारियां भी अहम,,,,

शेख असलम की रिपोर्ट,,,,,
जुलूस-ए-मुहम्मदी ﷺ : मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ के साथ हमारी जिम्मेदारियां भी अहम

बिलासपुर-जुलूस-ए-मुहम्मदी ﷺ सिर्फ़ सड़क पर निकलने का नाम नहीं, बल्कि मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ, अदब, सीरत और अच्छे अख़लाक़ का पैग़ाम है। इस मुबारक मौके पर जुलूस में शामिल हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने आचरण से भी नबी-ए-करीम ﷺ की तालीम और इंसानियत का संदेश पेश करे।जुलूस के दौरान दुरूद व सलाम और नात-ए-पाक का माहौल रखें। किसी को ज़ुबान से तकलीफ़ न दें, रास्ते में अनुशासन बनाए रखें और एम्बुलेंस व राहगीरों का ख़याल रखें। पटाखों, हुड़दंग और गंदगी से बचें। साथ ही नमाज़ हर हाल में क़ायम रखें, जुलूस की वजह से नमाज़ क़ज़ा न हो।पड़ोसी, बुज़ुर्ग, बच्चे और ज़रूरतमंदों का ख़याल रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। जुलूस का उद्देश्य केवल आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि समाज में भाईचारे, शांति, सद्भाव और इंसानियत का संदेश पहुंचे।
📖 क़ुरआन:
“बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर दुरूद भेजते हैं; ऐ ईमान वालों! तुम भी उन पर दुरूद और खूब सलाम भेजो।” (सूरह अल-अहज़ाब, 33:56)
🌹 नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया:
“मुसलमान वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से दूसरे मुसलमान महफ़ूज़ रहें।” 📚 सहीह बुख़ारी, हदीस 10
❤️ याद रखिए!
मोहब्बत-ए-मुस्तफ़ा ﷺ सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि अदब, नमाज़, अच्छे अख़लाक़ और इंसानियत में भी नज़र आनी चाहिए।
जुलूस ऐसा हो कि लोगों के दिलों में अमन, भाईचारे और मोहब्बत का संदेश पहुंचे और लोग कहें—
🌹 ये उस नबी ﷺ के आशिक़ हैं जो पूरी इंसानियत के लिए रहमत बनकर आए। 🌹

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