"""8 news cg -"""लगन, मेहनत और समाजसेवा को सफलता का मूलमंत्र मानते हैं"""उद्योगपति प्रवीण झा,,,,""""बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में बोले प्रवीण झा—“समाज से लेते हैं तो समाज को देना भी हमारा दायित्व”,,,,
लगन, मेहनत और समाजसेवा को सफलता का मूलमंत्र मानते हैं उद्योगपति प्रवीण झा,,,,
बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में बोले प्रवीण झा—“समाज से लेते हैं तो समाज को देना भी हमारा दायित्व”,,,,
बिलासपुर-समाजसेवी एवं उद्योगपति प्रवीण झा ने कहा कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। लगन, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ किए गए कार्य निश्चित रूप से व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि इंसान को हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए, क्योंकि अच्छे कार्य का परिणाम हमेशा अच्छा ही मिलता है।
बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में प्रवीण झा ने अपने जीवन के संघर्ष, अनुभव, समाजसेवा और बिलासपुर के विकास को लेकर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, सचिव संदीप करिहार, कोषाध्यक्ष किशोर सिंह एवं सहसचिव हरिकिशन ने उनका साल, श्रीफल एवं मोमेंटो भेंटकर सम्मान किया।
नौकरी नहीं, रोजगार देने का सपना लेकर बढ़े आगे
प्रवीण झा ने अपने शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष 1993 में जिंदल में काम किया। उस समय वे साइकिल से आवागमन करते थे और स्टेशन से काम तक आने-जाने के लिए महज चार रुपये किराया खर्च होता था। संघर्ष के उस दौर ने उनके भीतर आगे बढ़ने और कुछ अलग करने का संकल्प पैदा किया।
उन्होंने बताया कि उन्होंने मन में यह विचार बनाया कि केवल नौकरी करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा कार्य किया जाए, जिसके माध्यम से दूसरे लोगों को भी रोजगार और काम के अवसर मिल सकें। उनका सपना समाज को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने का रहा है।
बिलासपुर के विकास पर चिंता जताते हुए प्रवीण झा ने कहा कि देश विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मूलभूत सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।
उन्होंने विशेष रूप से बिलासपुर में फायर ब्रिगेड की बेहतर व्यवस्था, हवाई सेवा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि रायपुर की तुलना में बिलासपुर का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर को उसके अधिकार और विकास के लिए लगातार आवाज उठानी होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विशाल मशाल रैली निकालने की रूपरेखा नवंबर से दिसंबर के बीच तैयार की जा रही है। उनका कहना था कि यदि अगले ढाई वर्षों में बिलासपुर के विकास को लेकर ठोस काम नहीं हुआ तो शहर विकास की दौड़ में काफी पीछे जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिलासपुर के हक और अधिकार के लिए जरूरत पड़ने पर किसी भी सरकार के सामने आवाज उठाई जाएगी।
“समाज से लेते हैं तो समाज को देना भी हमारा दायित्व”
प्रवीण झा ने समाजसेवा को जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताते हुए कहा कि समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है, इसलिए समाज के लिए कुछ करना हमारा दायित्व है। उनका मानना है कि जब हम दूसरों के लिए अच्छा करते हैं तो उसका सकारात्मक परिणाम कई गुना होकर हमारे जीवन में वापस आता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने का अवसर मिले तो उसे गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस दिन वे दो जरूरतमंद लोगों की मदद नहीं कर पाते, उस दिन उन्हें चैन नहीं मिलता।
युवाओं को दिया मेहनत और सकारात्मक सोच का संदेश
युवाओं को संदेश देते हुए प्रवीण झा ने कहा कि किसी भी काम को पूरी लगन और मेहनत से करना चाहिए। लोग क्या कह रहे हैं, इस पर अधिक ध्यान देने के बजाय अपने अच्छे कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्ची लगन, मेहनत और ईमानदार प्रयास सफलता का रास्ता खोलते हैं।
उन्होंने मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि आज मोबाइल पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने के कारण युवा विकास, सामाजिक जिम्मेदारियों और आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं। परिवार और समाज को मजबूत बनाने के लिए बच्चों और युवाओं को संस्कार, धर्म और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना जरूरी है।
प्रवीण झा ने कहा कि उनका सपना बिलासपुर में ऐसा बड़ा उद्योग स्थापित करने का है, जिसमें अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि किसी भी शहर का वास्तविक विकास तभी माना जा सकता है, जब वहां के युवाओं को पर्याप्त रोजगार और लोगों को बेहतर अवसर मिलें।हादसे के बाद ईश्वर की मदद का सुनाया अनुभव
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी एक घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार मनेन्द्रगढ़ में कोयला लोड कराने के दौरान एक जानवर से उनकी स्कूटर की टक्कर हो गई थी। हादसे के बाद उन्हें करीब 24 घंटे तक होश नहीं रहा। इस कठिन समय को याद करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह एक 11 वर्षीय बच्चे के रूप में उन्हें मदद मिली और उन्होंने इसे ईश्वर की कृपा के रूप में महसूस किया।
माँ वैष्णो देवी और ज्वालामुखी मंदिर की घटनाओं का भी किया उल्लेख,,,प्रवीण झा ने मां वैष्णो देवी की यात्रा से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए बताया कि यात्रा के दौरान उनकी पर्ची गुम हो गई थी और वे एक पेड़ के किनारे सो गए थे। इसी दौरान एक वृद्ध व्यक्ति ने उन्हें दो यात्रा पर्चियां दीं। उन्होंने इसे ईश्वर की कृपा से जोड़ते हुए कहा कि जब मन में सच्ची श्रद्धा और विश्वास हो तो ईश्वर किसी न किसी रूप में सहायता जरूर करते हैं।उन्होंने परिवार के साथ ज्वालामुखी मंदिर की यात्रा से जुड़े अनुभव का भी उल्लेख किया और कहा कि जीवन में सच्ची श्रद्धा, लगन और मेहनत के साथ आगे बढ़ने वाले व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी रास्ता मिलता है।धर्म, परिवार और समाज से जुड़ाव जरूरी,उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों और परिवार को धर्म, संस्कार और समाज से जोड़ना बेहद जरूरी है। केवल आर्थिक सफलता ही जीवन का अंतिम उद्देश्य नहीं हो सकती। व्यक्ति को अपने आसपास के लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना चाहिए और जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।कार्यक्रम के दौरान प्रवीण झा ने अपने अनुभवों के माध्यम से युवाओं और समाज को संदेश दिया कि “लोग क्या कह रहे हैं, इसकी चिंता किए बिना अच्छे कार्य करते रहना चाहिए। लगन और मेहनत के साथ आगे बढ़ेंगे तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमेगी।”
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें