""""8 NEWS CG -"""सरकारी स्कूल केवल भवन नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के भविष्य की नींव हैं"""इसलिए शिक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर की कमी को नजरअंदाज करने के बजाय उसका समयबद्ध समाधान होना जरूरी है,,,,, शासन की योजना पर उठे"""गंभीर सवाल?
यदि गणवेश जैसी बुनियादी सुविधा भी समय पर नहीं पहुंचती, तो योजना के क्रियान्वयन की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।अभिभावकों ने उठाए कई गंभीर सवाल?
सरकारी स्कूल केवल भवन नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के भविष्य की नींव हैं। इसलिए शिक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर की कमी को नजरअंदाज करने के बजाय उसका समयबद्ध समाधान होना जरूरी है,,,,, शासन की योजना पर उठे सवाल?
कई महीनों से वेतन का इंतजार, स्कूल भवन का छज्जा गिरने से बाल-बाल बचा बड़ा हादसा; शिक्षकों की कमी और योजनाओं की सुस्त रफ्तार से अभिभावक चिंतित,,, गणवेश का अता पता नही,,,,,आखिर सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी?कई महीनों से वेतन का इंतजार, स्कूल भवन का छज्जा गिरने से बाल-बाल बचा हादसा; शिक्षकों की कमी और योजनाओं की सुस्त रफ्तार से अभिभावक चिंतित
जनहित में सवाल : आखिर सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी?
बिलासपुर- सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शासन स्तर पर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।न्यायधानी जिले जैसे मुख्य हृदय स्थल सत्यम चौक (मगरपारा रोड )में स्थित शासकीय स्कूल में कई महीनों से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने, स्कूल भवन के छज्जे के गिरने से बड़ा हादसा टलने, शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों को मिलने वाली शासकीय सुविधाओं की सुस्त प्रक्रिया को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बताई जा रही है।अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं दूसरी ओर स्कूल भवन की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। हाल ही में स्कूल का छज्जा गिरने की घटना ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गनीमत रही कि घटना के दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। यदि बच्चों की मौजूदगी में छज्जा गिरता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।कई महीनों से वेतन का इंतजार, कर्मचारियों की परेशानी बढ़ी,,,अभिभावकों के अनुसार स्कूल से जुड़े कुछ कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो रही हैं। सवाल यह है कि जब किसी कर्मचारी को समय पर उसका पारिश्रमिक नहीं मिलेगा, तो वह आर्थिक और मानसिक दबाव के बीच अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस प्रकार करेगा?अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था केवल विद्यार्थियों और शिक्षकों तक सीमित नहीं है। स्कूल में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और उन्हें समय पर वेतन मिलना भी व्यवस्था की मूलभूत जिम्मेदारी है।शिक्षकों की कमी से पढ़ाई पर असर,,,,
अभिभावकों ने यह भी बताया कि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इससे अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। अभिभावकों का सवाल है कि सरकार जहां सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की बात करती है, वहीं यदि पर्याप्त शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो बच्चों की पढ़ाई का स्तर कैसे बेहतर होगा? अभिभावको के अनुसार बड़ी संख्या में स्कूल मे बच्चे पढ़ते है? ऐसे मे विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो जाता है।
गणवेश जैसी मूलभूत योजना भी सवालों के घेरे में
अभिभावकों से मिली जानकारी के अनुसार विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क गणवेश शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विद्यार्थियों को निर्धारित समय तक गणवेश उपलब्ध नहीं होने की बात उठाई भी गई है।अभिभावकों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य बच्चों को आर्थिक बोझ से राहत देना और उन्हें स्कूल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि गणवेश जैसी बुनियादी सुविधा भी समय पर नहीं पहुंचती, तो योजना के क्रियान्वयन की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।अभिभावकों ने उठाए कई गंभीर सवाल,,,,,अभिभावकों के मुताबिक स्कूल की मौजूदा स्थिति को केवल एक समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यहां बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की उपलब्धता, कर्मचारियों के वेतन और सरकारी योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन—चारों पहलू सीधे तौर पर विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े हैं।अभिभावकों का कहना है कि स्कूल भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराकर कमजोर हिस्सों की मरम्मत कराई जाए, शिक्षकों की कमी दूर की जाए, कर्मचारियों के लंबित वेतन का भुगतान किया जाए और विद्यार्थियों को मिलने वाली शासकीय सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।जनहित में जिम्मेदार विभाग से अपेक्षा,,,स्कूल में छज्जा गिरने की घटना के बाद भवन की सुरक्षा को लेकर तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत कराना प्राथमिकता होना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की उपलब्धता की समीक्षा और लंबित वेतन के मामले में संबंधित विभाग द्वारा स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूल केवल भवन नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के भविष्य की नींव हैं। इसलिए शिक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर की कमी को नजरअंदाज करने के बजाय उसका समयबद्ध समाधान जरूरी है।अब देखने वाली बात होगी कि शिक्षा विभाग और प्रशासन इन शिकायतों पर क्या संज्ञान लेते हैं और बच्चों की सुरक्षा, पढ़ाई तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। इस बारे में जब हमने स्कूल के प्राचार्य से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने हमारा कॉल रिसीव नहीं किया?? अभिभावकों के अनुसार अधिकतर प्राचार्य और जिम्मेदार स्टाफ लेट लतीफ स्कूल पहुंचने के नाम से जाना जाता है?
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें