""""8 NEWS CG -""""“गरीबों को क्यों घुमाते हैं आप लोग?” वेतन भुगतान में देरी पर ठेकेदार और अधिकारियों पर भड़कीं महापौर पूजा विधानी,,,,,,
“गरीबों को क्यों घुमाते हैं आप लोग?” वेतन भुगतान में देरी पर ठेकेदार और अधिकारियों पर भड़कीं महापौर पूजा विधानी,,,,
एक साल से लंबित छह महीने के वेतन का मामला लेकर महापौर के पास पहुंचा वाहन चालक राकेश शर्मा, फोन पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार को जल्द भुगतान के दिए निर्देश
बिलासपुर- नगर निगम में कार्यरत एक वाहन चालक को अपने छह महीने के वेतन के भुगतान के लिए अधिकारियों और ठेकेदार के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। लंबे समय तक परेशान होने के बाद जब वाहन चालक राकेश शर्मा अपनी समस्या लेकर महापौर पूजा विधानी के पास पहुंचा, तो उन्होंने मामले पर नाराजगी जताते हुए,,संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार को फोन कर जमकर फटकार लगाई। महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गरीब कर्मचारियों को इस तरह क्यों घुमाया जा रहा है? जब कर्मचारी ने काम किया है, तो उसके वेतन का भुगतान समय पर होना चाहिए।
छह महीने के वेतन के लिए लगा रहा था चक्कर
मामला बिलासपुर नगर निगम की वाहन शाखा में डंपर चालक के रूप में कार्यरत राकेश शर्मा से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, राकेश शर्मा ने वर्ष 2025 में नगर निगम के जोन क्रमांक 7 और 8 में छह महीने तक काम किया था। आरोप है कि काम पूरा करने के बावजूद उसे संबंधित अवधि का वेतन अब तक नहीं मिला है।
अपने मेहनताने के भुगतान के लिए राकेश शर्मा लंबे समय से अधिकारियों और ठेकेदार के पास चक्कर लगा रहा था। लगातार प्रयासों के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आखिरकार उसने महापौर पूजा विधानी के समक्ष अपनी परेशानी रखी।
वाहन चालक की समस्या सुनने के बाद महापौर पूजा विधानी ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार से फोन पर बात कर राकेश शर्मा के लंबित वेतन का जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।महापौर ने अधिकारियों और ठेकेदार से सवाल किया कि जब कर्मचारी अपना काम कर चुका है, तो उसे वेतन के लिए बार-बार क्यों भटकना पड़ रहा है? उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी को उसके मेहनताने के लिए इस तरह परेशान करना उचित नहीं है। संबंधित अधिकारियों को मामले का शीघ्र निराकरण करने और कर्मचारी को उसका बकाया भुगतान दिलाने के लिए कहा गया।मौखिक आदेश नहीं, लिखित आदेश की व्यवस्था हो,,,
महापौर ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी को एक जोन से दूसरे जोन में काम के लिए भेजा जाता है, तो संबंधित आदेश मौखिक रूप से देने के बजाय लिखित रूप में जारी किया जाना चाहिए। इससे कर्मचारी के कार्यस्थल, जिम्मेदारी और वेतन भुगतान को लेकर भविष्य में विवाद की स्थिति नहीं बनेगी।उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करने के निर्देश दिए कि यदि कोई कर्मचारी एक जोन से दूसरे जोन में जाकर काम करता है, तो उसका वेतन किस जोन से तैयार किया जाएगा। जिस जोन में कर्मचारी काम कर रहा है, वहां से वेतन बनेगा या जिस जोन से उसे भेजा गया है, वहां से भुगतान की प्रक्रिया पूरी होगी—इस संबंध में स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
एक ही ठेकेदार के जिम्मे वाहन शाखा का काम, फिर वेतन में देरी क्यों?इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। जानकारी के अनुसार, नगर निगम की वाहन शाखा का ठेका ज्योति ट्रेडर्स (अजय ताम्रकार )के पास है। ऐसे में वाहन चालक द्वारा वर्ष 2025 में किए गए छह महीने के काम का वेतन लंबे समय तक लंबित रहना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।यदि कर्मचारी ने निर्धारित अवधि में अपनी सेवाएं दी हैं, तो उसके वेतन भुगतान में देरी के कारणों की जांच और जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है। साथ ही, संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि भविष्य में अन्य कर्मचारियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल वाहन चालक राकेश शर्मा वर्तमान में नगर निगम के जोन क्रमांक 4 में अपनी सेवाएं दे रहा है। महापौर पूजा विधानी द्वारा मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार को निर्देश दिए जाने के बाद उसे अपने लंबित वेतन का भुगतान जल्द मिलने की उम्मीद जगी है।
हालांकि, वेतन भुगतान वास्तव में कब तक होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी और ठेकेदार महापौर के निर्देशों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं और एक साल से लंबित भुगतान की समस्या का समाधान कब तक हो पाता है।
सवाल यही है कि मेहनत करने के बाद भी एक कर्मचारी को अपने ही वेतन के लिए महीनों तक चक्कर क्यों लगाने पड़ें? नगर निगम प्रशासन को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, जिसमें कर्मचारियों को उनके काम का भुगतान समय पर मिले और जिम्मेदारी तय करने के लिए उन्हें अधिकारियों के दरवाजे न खटखटाने पड़ें।
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